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मुनिश्री विश्रांत सागर जी महाराज ने कहा कि हिंसा  कोई धर्म नहीं है, हिंसा  करना किसी भी धर्म ग्रंथ में नहीं लिखा हुआ है, भहसा करने वाला भगवान को धोखा देता है।
आचार्य सुकुमालनंदी जी महाराज ने कहा कि असफलता एक चुनौती है, उसको स्वीकार करना चाहिए, क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो, जब तक सफल नहीं हो जाओ, नींद चौन सब का त्याग कर देना चाहिए और संघर्ष का मैदान कभी छोडक़र भागना नहीं चाहिए। 
भगवान पाश्र्वनाथ का मोक्ष कल्याणक पर्व शुक्रवार को श्री दिगम्बर जैन नसियां अमीरगंज टोंक में प्रात: 8 बजे चिन्मयनन्दी जी महाराज के सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। प्रात: आदिनाथ भगवान, शांतिनाथ भगवान एवं पाश्र्वनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजा की गई। श्रावकों ने निर्वाण कांड बोलकर निर्वाण लड्डू चढ़ाया।
सुदर्शनोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र आवां में मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी, मुनि महा सागर जी, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर जी व क्षुल्लक गभ्भीर सागर जी के चातुर्मास से क्षेत्र में धर्म, ज्ञान का अनुपम संचार हो रहा है।
संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज, मुनि महासागर जी, मुनि निष्कंप सागर जी, क्षुल्लक धैर्य सागर जी व क्षुल्लक गंभीर सागर के सानिध्य में सुदर्शनोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र नावां में भक्ति और ज्ञान की अलख जग रही है। रविवार को तीर्थ क्षेत्र पर देशभर के हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
देवली उपखण्ड के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र ‘सुदर्शनोदय’ तीर्थ आंवा में चल रहे चातुर्मास मे महाराज ससंग में मुनि श्री सुधा सागर जी ने अपने मंगल प्रवचनों मे कहा की तीन तरह से जातक पाप का भागी बनता है
मुनिश्री विश्रांत सागर जी महाराज ने कहा कि योगी की शोभा ध्यान से होती है। साधु ध्यान नहीं करता है तो योगी कहलाने का पात्र नहीं है। योगी का मतलब ध्यान में लीन रहना, संयम की शोभा तप से है। मुनिश्री ने उक्त विचार गुरुवार को दंग की नसियां में धर्मसभा में व्यक्त किए।
संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जो मनुष्य अपने मां-बाप की सेवा नहीं करते वे इस जन्म में सुखी नहीं होते हैं
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी ने कहा कि कमजोर व्यक्ति से दुश्मनी ज्यादा खतरनाक होती है।
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी ने कहा कि मुर्खों से कभी तर्क मत कीजिये, क्योंकि पहले वे आपको अपने स्तर पर लाएंगे और फिर अपने ओछेपन से आपकी धुलाई कर देंगे।

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