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मुनिश्री विश्रांत सागर जी महाराज ने कहा कि योगी की शोभा ध्यान से होती है। साधु ध्यान नहीं करता है तो योगी कहलाने का पात्र नहीं है। योगी का मतलब ध्यान में लीन रहना, संयम की शोभा तप से है। मुनिश्री ने उक्त विचार गुरुवार को दंग की नसियां में धर्मसभा में व्यक्त किए।
संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जो मनुष्य अपने मां-बाप की सेवा नहीं करते वे इस जन्म में सुखी नहीं होते हैं
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी ने कहा कि कमजोर व्यक्ति से दुश्मनी ज्यादा खतरनाक होती है।
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी ने कहा कि मुर्खों से कभी तर्क मत कीजिये, क्योंकि पहले वे आपको अपने स्तर पर लाएंगे और फिर अपने ओछेपन से आपकी धुलाई कर देंगे।
संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि तृष्णा रूपी ज्वालाएं इस जीव को जला रही है।
उपखण्ड के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र ‘सुदर्शनोदय’ तीर्थ आंवा मे चल रहे चातुर्मास में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 महासागर जी
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति फर्श से अर्स पर क्यों आ जाता है? ऊंचाइयों पर टिके रहना मुश्किल क्यों है? हमें मानव के पतन का कारण खोजना है।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि आलोचना से कोई भी नहीं बच सकता।


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