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भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार अभिनेता अमरीश पुरी के जन्मदिन के अवसर पर शनिवार को गूगल ने विशेष डूडल बनाकर उन्हें याद किया। गूगल ने अपने डूडल में अमरीश पुरी का मुस्कुराता हुआ एक स्केच बनाया है। हिदी फिल्मों के सबसे यादगार विलेन अमरीश पुरी का आज 87वां जन्मदिन है।
राष्ट्रीय राजधानी में इस बार भीषण गर्मी के कारण ओजोन का स्तर कई गुना बढ़ गया, जिससे लेागों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
मिस इंडिया 2019 सुमन राव का कहना है कि उनकी जीत उनके समुदाय के लिए बहुत बड़ी बात है और सभी के लिए आशा की नयी किरण लेकर आई है। राजस्थान में उदयपुर के पास एक गांव में जन्मी राव जब महज एक साल की थीं, तभी उनका परिवार मुंबई रहने आ गया था।
नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक चांद पर सूर्य के प्राचीन रहस्यों के सुराग मौजूद हैं जो जीवन के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। करीब चार अरब साल पहले सूर्य सौर मंडल में तीव्र विकिरणों, उग्र वेगों, उच्च ऊर्ज़ा वाले बादलों और कणों के घातक प्रकोप से गुजरा था।
मशहूर डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन से सालाना 22 मेगाटन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जो लास वेगास और वियना जैसे शहरों के कुल कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन के बराबर है। एक अध्ययन में इस बात की जानकारी मिली है। जर्मनी में टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (टीयूएम) से
टेलीविजन के इतिहास में कई ऐसे क्षण आए जब दुनिया भर की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिक गई, ऐसा ही एक क्षण था अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग का चांद पर उतरना। यानी पूरी दुनिया की निगाहें टीवी पर। यह वह क्षण था जो मानव इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ था।
मध्यप्रदेश के बैतूल नगर को एक व्यक्ति-एक पौधा अभियान के माध्यम से पुरानी पहचान देने की कोशिश की जा रही है। जिला प्रशासन द्बारा प्रयास किये जा रहे है कि नगरीय क्षेत्र की सभी सड़कों के किनारे छायादार पौध लगाकर सड़कों को फिर हरा-भरा बनाया जाए।
बेंगलुरु। भारत के अंतरिक्ष इतिहास के सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण कार्यक्रम का सामना करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 15 जुलाई को श्रीहरिकोटा से अपने महत्वाकांक्षी और पूर्णत स्वदेशी चंद्रयान-2 मिशन का प्रक्षेपण करेगा। इसरो के अध्यक्ष डॉ. के. शिवन ने यह जानकारी दी।
वायु प्रदूषण से होने वाली घातक बीमारियों की वजह से भारत में जीवन प्रत्याशा यानी औसत आयु 2.6 साल घट गई है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन सीएसई की एक ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 
नई दिल्ली। कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह, रक्तचाप और टीबी जैसी बीमारियों की रोकथाम में मददगार 'कड़कनाथ’ एक समय अस्तित्व का संकट झेल रहा था लेकिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और अन्य संस्थानों की मदद से अब यह देश के कोने कोने में 'बांग’ दे रहा है।
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