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आज से चार दशक पहले लौटते हैं तो शिक्षा व्यवस्था, विद्यालय, विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावकों में बड़ा अंतर था, उस समय आज की तरह भागम भाग नहीं थी, हर चीज के लिए वक्त था।
समय-समय पर ऐसी मांग उठती रही है कि डॉक्टर मरीजों के लिए बनाई जाने वाली पर्ची पर परामर्श के तौर पर निदेर्शों और खासकर दवाइयों के नाम और जांच के बारे में स्पष्ट और बड़े अक्षरों में लिखे, ताकि वह न केवल कंपाडंडरों और दवा दुकानदारों, बल्कि खुद मरीजों या उनके परिजनों को भी आसानी से समझ में आ जाए। 
संयुक्त राष्ट्र संघ की यह रिपोर्ट उत्साह बढ़ाती है, जिसमें कहा गया है कि भारत में दस सालों में 27 करोड़ लोगों ने गरीबी की रेखा पार की है।
धैर्य का अर्थ सब कुछ सहन करना नहीं होता है, धैर्य का अर्थ होता है कि धारण करने योग्य बातों, कार्यों, घटनाओं और अन्य चीजों को लेने के लिए, ग्रहण करने के लिए बेशक थोड़ा कष्ट सहन करना पड़े तो भी उसे सहने से हमारी मौलिकता में निखार आएगा, वह कम नहीं होगी, खत्म नहीं होगी।
बाल यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए देश की शीर्ष अदालत और केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इससे सुरिक्षत बचपन की एक नई उम्मीद जगी है।
आज की इस चकाचौंध भरी दुनिया में मैन पावर और मनी पावर का जबरदस्त प्रभाव बढ़ता जा रहा है। दुनिया की भौतिक सम्पति कुछ प्रतिशत लोगों के हाथों में सिमटी हुई है और सिमटती जा रही है।
अब तक देश के 43 फीसदी इलाके में कम बारिश हुई है। लेकिन सूखे का खतरा फिलहाल नहीं है, मौसम विभाग और कृषि से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में मानसून की सक्रियता ठीक चल रही है और अगले कुछ दिनों में स्थिति सुधर जाएगी।
देश का कोई भी राज्य स्थानीय निकायों के स्तर पर ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा, मेडिकल कचरा और निर्माण कार्यों के कचरे के निस्तारण संबंधी कचरा प्रबंधन नियम 2016 का पालन नहीं कर पा रहा है।
लक्ष्य विहीन व्यक्ति का जीवन डावांडोल होता है, उसका अपना कुछ नहीं होता है, वह तो दूसरों के जीवन पर आधारित होता है। वह देखा देखी करता है, नकल करता है, अंधी होड़ करता है।
नैनो प्लास्टिक इंसानी शरीर पर किस तरह बुरा असर डालते हैं, इस पर काफी शोध हुआ है। भारत सहित दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों ने इस मामले पर गहन अध्ययन किया है।
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