जेट संकट से विमानन क्षेत्र का प्रदर्शन 68 माह में सबसे कमजोर

Samachar Jagat | Friday, 26 Apr 2019 03:43:15 PM
Aviation sector performance in jet crisis was the weakest in 68 months

नई दिल्ली। वित्तीय संकट से जूझ रही निजी विमान सेवा कंपनी जेट एयरवेज की उड़ानें बड़ी संख्या में रद्द होने के कारण मार्च में देश के विमानन क्षेत्र का प्रदर्शन 68 महीने के निचले स्तर पर आ गया और यात्रियों की संख्या बढ़ने की रफ्तार घटकर 0.14 प्रतिशत रह गई। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्बारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में घरेलू मार्गों पर यात्रियों की संख्या एक करोड़ 15 लाख 96 हजार रही जो मार्च 2018 के एक करोड़ 15 लाख 80 हजार की तुलना में 0.14 प्रतिशत अधिक है। यात्रियों की संख्या की वृद्धि दर सितंबर 2014 से 2018 के अंत तक लगातार दहाई अंक में रही थी, हालाँकि हाल के महीनों में इसकी रफ्तार काफी कम रह गई थी। 

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उड़ानें रद्द होने के कारण मार्च में जेट एयरवेज की बाजार हिस्सेदारी घटकर 4.6 प्रतिशत रह गई। इससे पहले जनवरी में यह आंकड़ा 11.9 प्रतिशत और फरवरी में 11.33 प्रतिशत रहा था। इंडिगो की बाजार हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 46.9 प्रतिशत रही। लंबे समय के बाद उसने 45 प्रतिशत का आंकड़ा पार किया। किफायती विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट 13.6 प्रतिशत के साथ दूसरे और सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया 13.1 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रही। गोएयर की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 9.9 प्रतिशत, एयर एशिया की 5.9 प्रतिशत और विस्तारा की 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। 

भरी सीटों यानी पैसेंजर लोड फैक्टर (पीएलएफ) के मामले में स्पाइसजेट का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। उसकी औसतन 93 प्रतिशत सीटें भरी रहीं। गो एयर का पीएलएफ 91.4 प्रतिशत, एयर एशिया और जेट लाइट का 87.5 प्रतिशत, विस्तारा का 86.8 प्रतिशत, जेट एयरवेज का 86.7 प्रतिशत, इंडिगो का 86 प्रतिशत और एयर इंडिया का 80.3 प्रतिशत रहा। 

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उड़ानें रद्द होने के कारण यात्रियों की सबसे ज्यादा शिकायत जेट एयरवेज के खिलाफ ही रही। जेट एयरवेज और जेटलाइट के खिलाफ कुल 1,013 शिकायतें यानी प्रति एक लाख यात्री 151 शिकायतें आईं। प्रति एक लाख यात्री एयर इंडिया के खिलाफ 18, स्पाइसजेट और इंडिगो के खिलाफ पांच-पांच, गो एयर के खिलाफ चार, एयर एशिया और ट्रूजेट के खिलाफ दो-दो शिकायतें आईं। यात्रियों की सबसे ज्यादा 60 प्रतिशत शिकायत उड़ानों संबंधी समस्याओं को लेकर रही। इसके बाद 16.3 प्रतिशत शिकायत बैगेज से संबंधित, 11.8 प्रतिशत रिफंड को लेकर और 6.3 प्रतिशत ग्राहक सेवा को लेकर रही।-एजेंसी



 

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