केवाईसी के नाम पर ऐप इन्स्टॉल करने की गलती नहीं करें, ई-वाॅलेट से निकल जाएंगे पैसे

Samachar Jagat | Thursday, 10 Oct 2019 09:34:40 AM
Do not make the mistake of installing an app in the name of KYC, money will come out of the e-wallet

इंटरनेट डेस्क। आपके पास यदि ई-वॉलेट की केवाईसी कराने के लिए किसी ऐप इन्स्टॉल करने के लिए कहा जाता है तो सतर्क हो जाइए, क्योंकि साइबर ठग केवाईसी कराने के नाम पर ऐप इन्स्टॉल कराने के बाद आपका फोन अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। इसके बाद आपके खाते की तमाम रकम आरोपित के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद जिले में पिछले 14 दिन में 156 लोगों के साथ साइबर वारदात हो चुकी है। इनमें 29 मामलों में केवाईसी के नाम पर ऐप इन्स्टॉल कराकर ठगी की गई है। पुलिस इन ठगों पर कार्रवाई करने नाकाम है।


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गाजियाबाद जिले में बढ़ते साइबर अपराध के मद्देनजर नगर कोतवाली में 24 सितंबर को तकनीकी सुविधाओं से लैस साइबर सेल का उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के बाद साइबर सेल में 156 साइबर अपराध की शिकायतें आई हैं। इनमें से सेल ने 31 शिकायतों को संबंधित थाने में भेज दिया है। अपग्रेडेड साइबर सेल में अभी तक एक भी शिकायत का निस्तारण नहीं हुआ है। थाने में भेजी गई शिकायतों की हालत ये है कि थाना पुलिस सीसीटीवी कैमरे आदि खंगालने के बाद खानापूर्ति कर रही है। जालसाज ओएलएक्स पर सामान खरीदने व बेचने के नाम पर यूपीआइ पर रिक्वेस्ट मनी भेजकर ठगी कर रहे हैं।

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यूपीआइ के जरिये पिछले 14 दिनों में 34 लोगों को ठगा गया है। कविनगर में एक महिला के ई-वॉलेट की केवाईसी कराने के नाम पर साइबर ठगों ने 55 हजार रुपये खाते से साफ कर दिए। पीड़िता ने साइबर सेल में मामले की शिकायत की है। बिनाका अग्रवाल गौड़ सिटी ग्रेटर नोएडा में परिवार के साथ रहती हैं। वह कविनगर में नौकरी करती हैं। मंगलवार को वह कार से ऑफिस जा रही थीं। इस दौरान उनके मोबाइल पर एक फोन आया। कॉल करने वाले उन्हें केवाईसी कराने के लिए कहा। पहले तो महिला ने केवाईसी कराने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में आरोपित ने प्रलोभन दिया तो महिला केवाईसी कराने के लिए राजी हो गई। इसके बाद आरोपित ने उनके खाते की डिटेल लेकर अपने खाते में 55 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिए। रकम ट्रांसफर करने के लिए आरोपित ने ओटीपी भी खुद ही ले लिया। पीड़िता ने इस दौरान ऐप को डिलीट करने की कोशिश की, लेकिन वह डिलीट नहीं हो सका। पीड़िता ने साइबर सेल में मामले की शिकायत की है।
 



 

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