जीडीपी वृद्धि दर पहली तिमाही में 5 प्रतिशत रही, छह साल के निचले स्तर पर पहुंची

Samachar Jagat | Saturday, 31 Aug 2019 09:26:01 AM
GDP growth rate of 5 percent in first quarter, reached six-year low

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक माहौल खराब रहने के बीच घटती मांग और गिरते निजी निवेश से देश की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती का असर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दिखने लगा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर लगातार पांचवी तिमाही में कम होकर 5 प्रतिशत रह गई। यह पिछले छह साल से अधिक समय में सबसे कम वृद्धि दर रही है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी।

इसके बाद भारत से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा छिन गया है। पहली तिमाही में देश की वृद्धि दर चीन से भी नीचे रही है। अप्रैल-जून तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही जो उसके 27 साल के इतिहास में सबसे कम रही है। देश की जीडीपी वृद्धि पहली तिमाही में पांच प्रतिशत रही है। यह वित्त वर्ष 2012-13 की जनवरी-मार्च तिमाही के बाद सबसे निचला स्तर है।

वित्त वर्ष 2012-13 की चौथी तिमाही (जनवरी- मार्च में) वृद्धि दर 4.3 प्रतिशत के निचले स्तर पर रही थी जबकि एक साल पहले 2018-19 की पहली तिमाही में यह 8 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2019 में वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत और समूचे वित्त वर्ष 2018- 19 में यह 6.8 प्रतिशत रही है।

सरकार के मुख्य आॢथक सलाहकार के. वी. सुब्रहमण्यम ने कहा कि देश के जीडीपी आंकड़े दिखाते हैं कि वृद्धि अभी भी ऊंची है बस पहले की तुलना में थोड़ी नरमी आयी है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में इस तरह का रुख 2013-14 की अंतिम तिमाही में भी देखा गया था।

सुब्रहमण्यम ने कहा कि इसके पीछे (नरमी) आंतरिक और बाहरी दोनों कारण जिम्मेदार हैं। सरकार हालात को लेकर काफी सचेत है विशेषकर नरमी में योगदान देने वाले चीन-अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार तनाव और वैश्विक स्तर विकसित होती आर्थिक चुनौतियों को लेकर सरकार पूरा ध्यान रख रही है।

जीडीपी आंकड़ों की घोषणा से पहले सरकार ने शुक्रवार को 10 सरकारी बैंकों का विलय करके चार बड़े सरकारी बैंक बनाने की घोषणा की। इसका मकसद अर्थव्यवस्था में ऋण उपलब्धता को बढ़ाना है। यह सरकार के अर्थव्यवस्था को संबल देने वाले तीन चरणीय कदमों में दूसरा प्रयास है। इससे पहले पिछले हफ्ते सरकार ने वाहन क्षेत्र, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और बैंकों के नकदी स्तर बढ़ाने को लेकर तमाम घोषणाएं की थीं।

तीसरे चरण की घोषणाएं कुछ दिनों में की जा सकती हैं जो विशेषतौर पर रीयल्टी क्षेत्र से जुड़ी होंगी। सुब्रहमण्यम ने कहा कि सरकार लघु और मध्यम अवधि में हालात संभालने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘निवेश की दर वास्तव में बढ़ती दिख रही है। पूंजी का अनुप्रयोग अब बढ़ रहा है और यह 76 प्रतिशत से ऊपर है।’’

वित्त वर्ष 2019-20 के आम बजट में अगले पांच साल में बुनियादी निर्माण क्षेत्र में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। सुब्रहमण्यम ने कहा, ‘‘ मैं निवेश के पक्ष पर बात कर रहा हूं। हमें आश्वस्त होना चाहिए कि ऊंची वृद्धि कुछ समय में शुरू हो जाएगी। अभी हमारा पूरा ध्यान चालू वित्त वर्ष में अनुमानित सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के लक्ष्य को पाना है।’’

फिच समूह की इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि बचत में कमी विशेषकर आम घरों की बचत में कमी आना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। इसकी वजह से बुनियादी वृद्धि दर में नरमी दिख रही है।

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि लघु अवधि में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ और कदम उठाएगी। कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले रीयल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र का अन्य कई क्षेत्रों से सीधा जुड़ाव है। ऐसे में रीयल एस्टेट क्षेत्र का पुनरोद्धार निवेश और मांग दोनों के लिए अहम है।

पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्यवद्र्धन (जीवीए) वृद्धि 0.6 प्रतिशत रही जो एक साल पहले की इसी अवधि में 12.1 प्रतिशत थी। इसी तरह कृषि क्षेत्र में जीवीए वृद्धि कमजोर पडक़र दो प्रतिशत रही जो 2018-19 की अप्रैल-जून अवधि में 5.1 प्रतिशत पर थी।

निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ गयी है जो एक साल पहले की पहली तिमाही में 9.6 प्रतिशत थी। हालांकि, खनन क्षेत्र की वृद्धि में इजाफा हुआ है। आलोच्य अवधि में यह 2.7 प्रतिशत रही है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 0.4 प्रतिशत थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ वित्त वर्ष 2011-12 के स्थिर मूल्यों के आधार पर वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का आकार 35.85 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि वित्त वर्ष 2018-19 की अप्रैल-जून तिमाही में यह 34.14 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस प्रकार यह जीडीपी में पांच प्रतिशत वृद्धि दर को दर्शाता है। -(एजेंसी)



 

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