एतिहाद की खुली पेशकश से छूट, उड़ान समयसारणी की मांग पर विचार करना मुश्किल था : एसबीआई

Samachar Jagat | Saturday, 22 Jun 2019 07:22:26 AM
It was difficult to think of Etihad's open offer, discount demand for flight timings: SBI

मुंबई। सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि एतिहाद एयरवेज ने जेट एयरवेज के अधिग्रहण को लेकर खुली पेशकश से छूट और उड़ान समयसारणी को लेकर आश्वासन की मांग की थी। हालांकि, कर्ज में डूबी कंपनी को ऋण देने वाले कर्जदाताओं के पास मांगी गयी छूट देने का अधिकार नहीं था।

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बृहस्पतिवार को बैंक के जेट एयरवेज को दिवाला प्रक्रिया में लेने जाने के बैंकों के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘एयरलाइन के लिये समाधान तलाशने को लेकर यह उनका अंतिम प्रयास था। उन्होंने परिसमापन की संभावना से इनकार नहीं किया।’’

इस सप्ताह की शुरूआत एसबीआई की अगुवाई वाला 26 बैंकों के समूह ने ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता (आईबीसी) के तहत जेट एयरवेज मामले में समाधान का निर्णय किया क्योंकि उन्हें केवल एक सशर्त बोली प्राप्त हुई।

शेयर बाजारों को दी सूचना में एसबीआई ने कहा कि जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति कमजोर थी। कर्जदता परिचालन नुकसान के कारण पिछले एक साल से लगातार व्यवहारिक समाधान की कोशिश कर रहे थे। 

एसबीआई ने कहा कि इस संदर्भ में प्रतिष्ठित परार्शदाताओं...एसबीआई कैपिटल, मैकिन्से..की परामर्शदाता के रूप में सेवा ली गयी है। नये निवेशकों को लाने के लिये बोली प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय किया गया है।’’

बोली प्रक्रिया के तहत जेट एयरवेज में निवेश के लिये रूचि पत्र आमंत्रित किये गये थे। एतिहाद, एनआईआईएफ, टीपीजी कैपिटल तथा इंडिगो पार्टनर ने 10 अप्रैल 2019 को अपनी रूचि जतायी थी। बोली प्रक्रिया 10 मई 2019 को समाप्त हुई।

बोली समाप्त होने के बाद कोई बाध्यकारी बोलियां प्राप्त नहीं हुई। एतिहाद तथा अन्य संभावित निवेशकों के साथ पूंजी डालने को लेकर बातचीत हुई। एसबीआई ने शेयर बाजारों से कहा, ‘‘एतिहाद ने कुछ छूट की मांग की थी। इसमें खुली पेशकश से छूट, उड़ान समयसारणी का आश्वासन शामिल है। चूंकि कर्जदाताओं के पास ये छूट देने का अधिकार नहीं था , अत: इस पर बातचीत को व्यवहारिक नहीं माना गया।’’

उसने कहा कि चूंकि एक भरोसेमंद समाधान योजना नहीं बन पायी और दैनिक कार्यों को लेकर कर्ज देने वाले दो कर्जदाता (आपरेशनल क्रेडिटर) पहले ही एनसीएलटी के पास जा चुके थे, ऐसे में सदस्य बैंकों ने सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के पास जाना उचित समझा। -(एजेंसी)



 

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