वैश्विक प्रतिस्पर्धी बड़े बैंक बनाने के लिए सरकारी बैंकों का विलय : जेटली

Samachar Jagat | Thursday, 28 Feb 2019 05:15:02 PM
Jaitley: The merger of government banks to make global competitive big banks

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा बताते हुये गुरूवार को कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धी एवं मजबूत बड़े बैंक बनाने के उद्देश्य से सरकार विलय की नीति अपना रही है। जेटली ने यहां भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के कार्यक्रम में कहा कि सरकारी बैंक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है और इनको मजबूत बनाये रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों के कामकाज और बड़े पदों पर नियुक्ति में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रही है और अभी ये बैंक प्रतिस्पर्धी माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों की भूमिका निजी क्षेत्रों से अलग है।

सरकारी बैंक रोजगार निर्माण और अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखकर काम करते हैं जबकि निजी क्षेत्र कैंपस भर्ती करते हैं। सरकारी बैंक ऐसा नहीं कर सकते हैं। इनकी कुछ सामाजिक जिम्मेदारी है। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दो दिन वर्षाें में गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी आयी है। इसके ग्राफ में भारी उतार आया है। मोदी सरकार ने ‘फोन बैंङ्क्षकग’ के प्रचलन को समाप्त किया है। बैंकों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनपीए या जोखिम में फंसे ऋण में शुरूआत में बढ़े थे क्योंकि सच्चाई से उसे उजागर करने को बनाया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी ऋण छिपा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने इस पर जोर दिया कि बैंकों को जोखिम में फंसे सभी संपदा के लिए प्रावधान करने चाहिए ताकि सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत बैंक की बच सके। उन्होंने कहा कि इन बैंकों को सशक्त बनाने के लिए विधायी या महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं ताकि आर्थिक तौर पर मजबूत बड़े बैंक बनाये जा सके जो वैश्विक प्रतिस्पर्धी भी हो। इसके लिए सरकार धीरे घीरे विलय की प्रक्रिया को भी बढ़ा रही है। एजेंसी



 

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