जेटली को भरोसा, वैधानिकता के पैमाने पर खरा उतरेगा आधार 

Samachar Jagat | Wednesday, 13 Sep 2017 06:51:09 PM
जेटली को भरोसा, वैधानिकता के पैमाने पर खरा उतरेगा आधार 

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को भरोसा जताते हुए कहा कि आधार कानून वैधानिकता के पैमाने पर खरा उतरेगा। उन्होंने कहा कि इसमें आंकड़ों की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय निहित हैं। 

जेटली ने वित्तीय समावेशन पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। जेटली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जबकि आधार को सरकारी योजनाओं तथा पैन कार्ड से अनिवार्य रूप से जोडऩे को उ‘चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी है। इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर में होगी।

आधार के बारे में जेटली ने कहा कि यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन संप्रग सरकार के समय एक उभरता हुआ विचार भर था। इसे विधायी मजबूती नहीं मिली थी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में इसे कानूनी संरक्षण मिला है और निजता एवं आंकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की गयी है।

उन्होंने कहा, आंकड़ों की गोपनीयता पर बहस तथा इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक कानून की आवश्यकता थी। आधार विधेयक पारित हो चुका है और मुझे यकीन है कि यह वैधानिकता के पैमाने पर खरा उतरेगा। पिछले महीने उच्चतम न्यायालय की नौ सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार दिया था। न्यायालय ने कहा था कि यह धारा 21 के तहत जीने के अधिकार और निजी स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है। 

जेटली ने आगे कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने हालिया फैसले में निजता के अधिकार को महत्वपूर्ण संवैधानिक गारंटी बताते हुए विचारणीय प्रतिबंधों की बात की थी। वित्तीय समावेशन के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में जन धन योजना के तहत 30 करोड़ परिवारों के बैंक खाते खोले गये हैं। 

इस योजना से पहले करीब 42 प्रतिशत परिवार ऐसे थे, जो बैंक सेवा से जुड़े हुए नहीं थे। उन्होंने कहा कि जन धन योजना बैंक खाते खोलने की देश की सबसे बड़ी मुहिम है। इसका लक्ष्य सभी व्यावसायिक बैंकों में शून्य जमा अधिशेष पर खाते खोलकर प्रत्येक परिवार को बैंकिंग प्रणाली से जोडऩा था।

जेटली ने कहा कि शून्य जमा अधिशेष वाले बैंक खातों का अनुपात 77 प्रतिशत से कम होकर 20 प्रतिशत रह गया है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुविधा का विस्तार होने से ये बैंक खाते भी परिचालन में आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि योजना की शुरआत के तीन महीने बाद सितंबर 2014 में 76.81 प्रतिशत खातों में जमा राशि शून्य थी। अब इस तरह के खाते कम होकर 20 प्रतिशत रह गये हैं। उन्होंने जन धन योजना को श्रेय देते हुए कहा कि अब 99.99 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम एक बैंक खाता हैं।

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