15 अगस्त से भाप के इंजन से रेल यात्रा का लुत्फ उठाएंगे लोग

Samachar Jagat | Thursday, 12 Apr 2018 02:25:23 PM
People will enjoy rail journey from steam engine from August 15
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नई दिल्ली। इंडियन रेलवे इस साल स्वतंत्रता दिवस से हरियाणा में रेवाड़ी से गढ़ी हरसरू के बीच भाप के इंजन से चलने वाली गाड़ी की नियमित सेवा आरंभ करने जा रही है, जिसमें लोग साधारण अनारक्षित टिकट लेकर रेल विरासत के इस अनूठे सफर का लुत्फ उठा पाएंगे।

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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्वनी लोहानी ने आज यहां रेल सप्ताह के मौके पर नयी दिल्ली स्टेशन से पुरानी दिल्ली के बीच स्वतंत्र भारत के पहले और भाप से चलने वाले रेल इंजन ‘आकााद’ के साथ चलने वाली 63 अप रेल सप्ताह एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायी।

लोहानी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के समीप गढ़ी हरसरू से रेवाड़ी के बीच भाप चालित इंजन से चलने वाली एक गाड़ी प्रत्येक रविवार को चलाई जाएगी। इस गाड़ी में साधारण द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित दो कोच लगाए जाएंगे और इसके लिए यात्री को साधारण अनारक्षित टिकट लेना होगा।

कोई भी भाप के इंजन वाली ट्रेन में सैर का आनंद उठा सकता है। लगभग 42 किलोमीटर की यह दूरी करीब 40 से 45 मिनट में तय होगी। उन्होंने कहा कि रेलवे दशकों से संग्रहालयों एवं कारखानों में कबाड़ बन चुके भाप के इंजनों को दोबारा चलने लायक बनाने में जुटी है और उसकी योजना है कि स्वतंत्रता के बाद 1947 में ब्रिटिश रेलवे से भारतीय रेलवे को हस्तांतरित होने वाले पहले इंजन‘आकााद’को रेवाड़ी से गढ़ी हरसरू’ तक चलाया जाएगा जबकि आगे चेन्नई में दूसरे सबसे पुराने भाप के इंजन को दक्षिण रेलवे के किसी मार्ग पर विरासत रेल के नाम पर चलाया जाएगा।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के मुताबिक पांचों पर्वतीय रेलवे- दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, नीलगिरि ऊटी रेलवे, कालका-शिमला रेलवे, नेरुल-माथेरान रेलवे और कांगड़ा वैली रेलवे में भी तय दिनों में नियमित रूप से भाप के इंजनों को चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाप के इंजन का सैलानियों में बहुत बड़ा आकर्षण है और इसका पर्यटन आकर्षण के लिए दोहन किए जाने की असीम संभावनाएं हैं।

इस मौके पर रेलवे बोर्ड और उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि रेवाड़ी से गढ़ी हरसरू तक भाप के इंजन के चलने वाली एक गाड़ी हर रविवार एवं छुट्टी के दिन चलेगी और इसके लिए दो भाप के इंजनों का इंतकााम किया जाएगा। एक इंजन रेवाड़ी से गाड़ी लेकर गढ़ी हरसरू तक आएगा और दूसरा इंजन गाड़ी को वापस लेकर रेवाड़ी जाएगा। डब्ल्यू पी 7200 आजाद अपने दिनों के सबसे ताकतवर इंजनों में से एक था। इससे मेल एक्सप्रेस गाडिय़ों को चलाया जाता था।

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अधिकारियों के मुताबिक रेवाड़ी में भाप इंजन की कार्यशाला में करीब 11 भाप के इंजनों को चलने योग्य बनाया जा रहा है। रेल संग्रहालय में  50 साल से रखे भाप के 3 इंजनों- फीनिक्स (1907), रामगूटी (1862) एवं फायरलैस (1953) को कार्यशील बनाया जाएगा। इन इंजनों से पर्यटकों के लिए लग्कारी ट्रेनें भी चलाने की योजना है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक एक पर भाप का इंजन आने जाने वाले यात्रियों के आकर्षण का केन्द्र बन गया। प्लेटफॉर्म क्रमांक एक और दो और फुटओवर ब्रिज पर लोगों में मोबाइल फोन से इंजन की तस्वीरें खींचने एवं वीडियो बनाने की होड़ लगी थी। इस मौके पर उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक विश्वेश चौबे और दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक आर एन सिंह भी मौजूद थे। 

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