एमएसएमई, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्योगों से खरीदारी के लिये नियमों में ढील दें लोक उपक्रम

Samachar Jagat | Monday, 09 Jul 2018 03:30:27 PM
Public Undertaking to ease the rules for purchasing from MSME, scheduled caste and tribal industries

नई दिल्ली। सरकार ने केंद्रीय लोक उपक्रमों और विभिन्न सरकारी विभागों से छोटे उद्योगों और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उद्यमियों से खरीदारी के लिये निविदा नियमों को सरल बनाने और कृत्रिम बाधाओं को दूर करने को कहा है। सरकार ने निविदा मंगाते समय कारोबार और पिछले अनुभव जैसी 'कृत्रिम बाधाओं' को दूर करने को कहा है ताकि इन उद्योगों से सरकारी खरीद को बढ़ावा दिया जा सके।

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वित्त वर्ष 2017-18 में कुल सरकारी खरीद में केवल 0.5' खरीद ऐसे उद्योगों से की गई जिनके मालिक अनुसूचित जाति या जनजाति से हैं। सरकारी खरीद नीति के अनुसार सालाना खरीद का 20' सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों से करना अनिवार्य है। इसमें भी 4' एमएसएमई अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंद्ध मालिकों के होने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में केंद्रीय लोक उपक्रमों के एमएसएमई से कम खरीद पर चिंता व्यक्त की थी।

साथ ही उनसे और अधिक खरीद को प्रोत्साहन देने की बात करते हुए समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही थी। हालांकि 2017-18 में केंद्रीय लोक उपक्रमों ने एमएसएमई से खरीद के 20' के लक्ष्य को पार कर लिया था और यह 26,207.46 करोड़ रुपये रही। हालांकि, अनुसूचित जाति या जनजाति से संबद्ध मालिकों के उद्योगों से की गई खरीद 541.8 करोड़ रुपये रही।

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इस अवधि में केन्द्र सरकार के उपक्रमों की कुल खरीद 1.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही। एमएसएमई सचिव ए.के. पांडा ने कहा, ''हमने केंद्रीय लोक उपक्रमों और सरकारी विभागों को कई बार अनुरोध करते हुए पत्र लिखा है कि वे अपने निविदा दस्तावेजों को फिर से देखें और कृत्रिम बाधाओं को हटाएं। उन्हें सिर्फ गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमत जैसे दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए।"- एजेंसी

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