अर्थव्यवस्था की मार का असर रावण के कारोबार पर भी दिखा

Samachar Jagat | Friday, 04 Oct 2019 09:56:04 AM
Ravan's business was also affected by the impact of economy

इंटरनेट डेस्क। देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था का असर सभी कारोबार और धंधों पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में रापण बनाने वाले कारीगरों को भी अपना जीवनयापन करने में मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। इस बार पुतलों के बाजार में रावण का कद और छोटा हो गया है। राजधानी के पश्चिम दिल्ली के तातारपुर गांव के पुतला बनाने वाले कारीगरों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।


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इन कारीगरों का कहना है कि अर्थव्यवस्था सुस्त है, साथ ही पुतला बनाने वाली सामग्रियों के दाम काफी चढ़ चुके हैं। ऐसे में हमें पुतलों का आकार काफी छोटा करना पड़ा है। दशहरा से करीब 45 दिन पहले आसपास के राज्यों के कारीगर पुतला बनाने वाले बड़े ‘दुकानदारोंश् के पास आ जाते हैं। पुतला बनाने वालों में दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक तक के कारीगर शामिल हैं।

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पिछले 25 साल से पुतला बना रहे महेंद्र ने बताया कि रावण का पुतला बनाने की सामग्री भी काफी महंगी हो चुकी है। 20 बांस की कौड़ी का दाम 1,200-1,300 रुपये हो गया है जो पिछले साल तक 1,000 रुपये था। पुतला बांधने में काम आने वाली तार भी 50 रुपये किलो के बजाय 150 रुपये में मिल रही है। कागज का दाम तो लगभग दोगुना हो गया है।  टैगोर गार्डन मेट्रो स्टेशन के नीचे पुतले बनाने में जुटे राजू ने कहा कि तातारपुर 40 फुट के पुतले का दाम 17,000 से 20,000 रुपये तक पहुंच गया है। पिछले साल तक यह 12,000-13,000 रुपये था। गोकुल ने बताया कि बच्चों के लिए बनाए जा रहे पांच से दस फुट के छोटे रावण का दाम 1,500 से 4,000 रुपये तक है। 
 



 

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