एशिया के एल्यूमिनियम बाजार में बढ रही है भारतीय कंपनियों की धमक

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Oct 2018 01:54:42 PM
The threat of Indian companies is increasing in the aluminum market of Asia

नई दिल्ली। एल्यूमिनियम के आयात पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की अमेरिका की गत मार्च में की गयी घोषणा और उसके बाद रूस की कंपनी रूसाल पर अप्रैल में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंध के बाद से वैश्विक एल्यूमिनियम बाजार में उथलपुथल मच गयी और कई देश पारंपरिक स्रोतों के बजाय नए विकल्प की खोज में जुट गए। भारतीय कंपनियां वेदांता और हिडाल्को ने इस मौके का फायदा उठाते हुए जापान और दक्षिण कोरिया के बाजार में अपनी जड़ें गहरी करनी शुरू कर दीं। 

जापान पहले आमतौर पर रूस की कंपनी रूसाल, अमेरिकी कंपनी अलकोआ, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी साऊथ32 और ब्रिटिश कंपनी रियो टिटो जैसे उत्पादकों से एल्यूमिनियम खरीदता था लेकिन अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने और रूसाल पर प्रतिबंध के कारण पारंपरिक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गयी और भारत की कंपनियों ने मौके का लाभ उठाते हुए तेजी से एशियाई बाजारों में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए। अमेरिका की व्यापारिक नीतियों के कारण एल्यूमिनियम की कीमतें सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयीं। 

इस दौरान जापान ने भारत से पहले से दोगुने 3,008 टन एल्यूमिनियम पिंड का आयात किया जबकि रूस से उसका आयात 10 फीसदी घटकर 1,85,685 टन पर आ गया। जापान के खरीदार आमतौर पर पहले भारत के एल्यूमिनियम उत्पाद को तरजीह नहीं देते थे लेकिन भारतीय कंपनियों द्वारा आयातित एल्यूमिनियम उत्पाद कम कीमत पर मिल जाती हैं, जिससे इसकी धाक जमनी शुरू हो गयी है। कारोबारियों के मुताबिक अमेरिका के प्रतिबंध के बाद ये ग्राहक अलग-अलग आपूर्तिकर्ताओं से एल्यूमिनियम की खरीद करने लगे हैं, ताकि वे आपूर्ति के लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर न हों। -एजेंसी 



 

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