दिल्ली मेट्रो जैसी परिवहन प्रणाली पूरी तरह सब्सिडी पर नहीं चल सकती: मंगू सिंह

Samachar Jagat | Saturday, 13 Oct 2018 12:18:46 PM
Transport system like Delhi Metro can not run completely subsidy

फरीदाबाद। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो जैसी स्वपोषित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली पूरी तरह से सब्सिडी पर नहीं चल सकती।  उन्होंने कहा कि सब्सिडी से केवल किराए में कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है लेकिन इससे सार्वजनिक परिवहन प्रणाली का अपना वहनीय मॉडल प्रभावित होता है। सिंह यहां जे सी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सतत शहरी यातायात के रूप में मेट्रो विषयक एक सेमीनार में बोल रहे थे। इस सेमीनार की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने की। सिंह ने मेट्रो किराया संशोधन को लेकर एक विद्यार्थी द्वारा पूछे गए सवाल पर कहा कि मेट्रो का किराया आठ वर्ष के अंतराल के बाद वर्ष 2017 में संशोधित किया गया। इससे पहले यह संशोधन वर्ष 2009 में हुआ था। डीएमआरसी को जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) का कुल 28,000 करोड़ रुपए का ऋण चुकाना है। 

उन्होंने कहा कि इस समय दिल्ली मेट्रो की भूमिगत लाइन की प्रति किलोमीटर की कुल निर्माण लागत 600 से 700 करोड़ रुपए है और ऊपरी लाइन की निर्माण लागत प्रति किलोमीटर 280 से 300 करोड़ रुपए है। यदि मेट्रो का किराया निरंतर अंतराल पर न बढ़ाया जाए तो दिल्ली मेट्रो द्बारा ऋण नहीं चुकाया जा सकता। मंगू सिंह ने बताया कि दिल्ली मेट्रो डायनेमिक ट्रेन शेड्यूलिंग, रिजनरेटिंग ब्रेकिंग सिस्टम तथा स्टेशन की छतों पर सौर ऊर्ज़ा जैसी नई तकनीक अपना रहा है जिससे बिजली की खपत कम होगी। 

उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो को संचालन में दक्षता लाने के लिए नए तकनीकी सुधारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने अपने परिसर में सौर ऊर्ज़ा उत्पादन परियोजना के संचालन के लिए भारतीय सौर ऊर्ज़ा निगम के साथ एक समझौता किया है। समझौते के तहत डीएमआरसी अपने परिसर में उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्ज़ा को अगले 25 वर्षों तक उत्पादनकर्ता से खरीदेगा और इसके तहत डीएमआरसी ऊर्ज़ा उत्पन्न होने में हुई वास्तविक लागत का ही भुगतान करेगा। इस समय डीएमआरसी के कुल खर्च का 38 प्रतिशत ऊर्ज़ा संसाधनों पर खर्च होता है। -एजेंसी 



 

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