उच्च न्यायालय में डिजिटाइज्ड हुए 25 लाख मुकदमें

Samachar Jagat | Tuesday, 13 Mar 2018 10:43:28 AM
25 lakh cases digitized in the High Court

इलाहाबाद। देश में सूचना तकनीकी से लैश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पिछले दो साल में लगभग पच्चीस लाख मुकदमों की फाइलें डिजिटाइज्ड हो चुकी है। योजना की शुरुआत करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा था कि शीघ्र ही लोगों को पत्रावली एवं न्यायालय आदेशों की प्रमाणित प्रतियाँ आन लाइन मिल सकेंगी।

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मुकदमों की फाइलों के डिजिटाइजेशन का काम युद्ध स्तर पर जारी है। एक सराहनीय प्रयास स्टाक होल्डिंग कार्पोरेशन लिमिटेड कंपनी एवं न्यायालय प्रशासन की अनिर्णय की स्थित के चलते परेशानियों का सबब बनता जा रहा है। सन् 1868 से 2015 तक की निर्णीत मुकदमों की फाइलों को उच्च न्यायालय परिसर में स्थित सेन्टर में मंगा लिया गया है।

यह कार्य तीन न्यायाधीशों की कमेटी की निगरानी में हो रहा है। 25 लाख फाइलों को डिजिटाज्ड किए जाने के बावजूद उसे आॅन लाइन नहीं किया जा सका है। सेन्टर में गयी फाइलों के आदेश की प्रति लेने की हजारों अर्जियां न्यायालय प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।

आये दिन वकीलों एवं उच्च न्यायालय कार्यालय कर्मियों के बीच बेवजह विवाद होने पर स्थित तनावपूर्ण हो रही है। डिजिटाइजेशन सेन्टर में चारों तरफ फाइलों का अम्बार लगा हुआ है। स्कैन हो चुकी फाइलें भी आॅनलाइन न होने के कारण वहीं पड़ी है।

नई निर्णीत मुकदमों की फाइलों को भी सेन्टर में लगातार भेजने का सिलसिला जारी है। स्कैन हो चुकी फाइलें नष्ट करने का आदेश जारी किया गया है लेकिन निर्णय नहीं लेने से अमल नहीं हो पा रहा है। इसमें पेच यह है कि स्कैन फाइलों को आॅनलाइन करने के बाद सत्यापन किए बगैर मूल फाइलें अगर नष्ट कर दी गयी तो गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।

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इसी बीच सीआईएस सिस्टम लागू करने की न्यायालय की योजना में तेजी लायी जा रही है जिससे वकीलों और वादकारियों को कोई परेशानी न हो। मुख्य न्यायमूर्ति डी.बी.भोसले सीआईएस सिस्टम को ठीक प्रकार से लागू करने को लेकर खुद मॉनिटरिंग करते हैं। किसी भी वकील की इस संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर उसका तत्काल समाधान किया जा रहा है। एजेंसी



 

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