जातीय समीकरणों के दिन लद गए: बीजेपी

Samachar Jagat | Sunday, 04 Nov 2018 02:06:30 PM
Days of Ethnic Equations: BJP

लखनऊ। यूपी भाजपा के अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय मानते हैं कि जातीय समीकरणों के दिन अब लद चुके हैं लेकिन विपक्षी दल अब भी गुजरे जमाने की राजनीति कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी बढ़ने के बीच सूबे में बीजेपी की रणनीति तथा सपा-बसपा के गठबंधन की सम्‍भावनाओं सहित विभिन्‍न राजनीतिक विषयों पर पेश हैं महेन्द्र नाथ पांडेय से भाषा के पांच सवाल : 
 

प्रश्‍न : प्रदेश में सपा और बसपा का सम्‍भावित गठबंधन भाजपा के लिए कितनी बड़ी चुनौती है?
उत्‍तर : जातीय समीकरणों के दिन अब लद चुके हैं। हमें नहीं लगता कि अगले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल भाजपा का सामना कर पाएंगे। वह अब भी गुजरे जमाने की राजनीति कर रहे हैं, जब जातीय समीकरण साधकर टिकटों का वितरण होता था और गठबंधन किये जाते थे। यह एक सक्रिय और निरन्तरता के साथ काम कर रहे प्रधानमंत्री का युग है।

-प्रश्‍न : वर्ष 2014 के मुकाबले 2019 में स्थितियां कुछ बदली हुई होंगी। भाजपा को इतना विश्‍वास क्‍यों है कि वह 2014 से भी ज्‍यादा प्रचंड बहुमत हासिल करेगी?
उत्‍तर : हमें विश्वास है कि हमारी पार्टी अपने बेहतरीन काम, सांगठनिक मजबूती और आम जनता से जमीनी स्तर से जुड़ाव की वजह से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में आसान जीत हासिल करेगी।

-प्रश्‍न : भाजपा की विरोधी पार्टियां उसके खिलाफ मजबूत रणनीति बनाने में जुटी हैं। आप क्या सोचते हैं?
उत्‍तर : यहां लोग गठबंधन करने की कोशिश में जुटे हैं। उनके गठजोड़ की गांठ मजबूत होगी या फिर और ज्यादा उलझ जाएगी, यह वक्त ही बताएगा। मगर हमें इसकी कतई परवाह नहीं है।

-प्रश्‍न : सपा और बसपा लगातार आरोप लगा रही हैं कि बीजेपी अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है?
उत्‍तर : केन्द्र में लगभग 10 वर्ष तक कांग्रेस की अगुवाई में संप्रग सरकार रही। बसपा प्रमुख मायावती और उस वक्त सपा अध्यक्ष रहे मुलायम सिंह यादव ने उस सरकार को समर्थन दिया, मगर इसके बावजूद उत्तर प्रदेश का विकास नहीं हो पाया, क्योंकि यह दोनों ही पार्टियां अपने-अपने राजनीतिक स्वार्थ साधने में लगी थीं। इससे पता चलता है कि विकास के प्रति ये पार्टियां कितनी जिम्‍मेदार हैं। जहां तक हमारे वादे पूरे करने का सवाल है तो देश में हो रहा विकास ही इसका जवाब है।

-प्रश्‍न : भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 से ज्यादा सीटें जीतने का मंसूबा बांध रही है। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में हार के बावजूद भाजपा के इस आत्‍मविश्‍वास की क्‍या वजह है?
उत्‍तर : उपचुनाव के परिणामों को पूरे देश का जनादेश नहीं माना जा सकता। भाजपा ने जमीनी स्‍तर तक अपनी पहुंच को बढ़ाया है। हम 73 प्‍लस का लक्ष्‍य जरूर हासिल करेंगे। पार्टी वर्ष 2014 में प्रदेश में हारी सात सीटों पर जीत के लिये विशेष योजना तैयार कर रही है।

भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में प्रदेश में अपने वोट प्रतिशत को 51 फीसदी से आगे ले जाना सुनिश्चित करेगी। इस वक्त भाजपा के पास अब तक की सबसे मजबूत टीम है, जिसमें समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हैं।



 

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