डॉ सिद्धार्थ को मिलेगा जीनियस इंडियन अचीवर अवार्ड 2019

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Apr 2019 09:13:27 AM
Dr. Siddhartha will receive Genius Indian Achiever Award 2019

“करो योग रहो निरोग” सब कहते हैं, सब जानते हैं, कि इसके फायदे बहुत हैं। फिर भी हम इसे दैनिक दिनचर्या की मांग नहीं बना रहे। योग करने के लिए किसी भी तथाकथित लागत जैसे कि जिम जाना , महंगे महंगे उपकरण खरीदना , विशेष डाइट प्लान का पालन करना इत्यादि की आवश्यकता नहीं है, केवल विशुद्ध इच्छा शक्ति होनी चाहिए। हम भारतवासी बड़े गर्व से कहते हैं कि अरे! योग तो हम हिंदुस्तानियों की देन है। हमारे ऋषि मुनि सो - डेढ़ सौ साल तक जीवित रहते थे केवल योग के द्वारा। पर जब उनसे उसी के बारे में पूछा जाता है तो उनके पास जवाब नहीं होता।

कुछ ऐसी ही पीड़ा का सामना करना पड़ा डॉ सिद्धार्थ यादव को। जिन्होंने योग का जिक्र देखा पर योग को प्रचलन में नही देखा। लोग योग का मौखिक प्रचार तो कर रहे थे पर करके कोई बताने को तैयार नहीं था कि योग का उचित व्यवहार क्या है? या यूँ कहे कि योग अत्याधुनिक जिम, हेल्थ सेंटर एवं तकनीकी चीजों के सामने थोड़ा कम चमक धमक वाला है तो लोग इसे सार्वजनिक रूप से करने में मन में संकुचित भाव लिए बैठे थे।

डॉ सिद्धार्थ यादव जो कि मूलतः खेतड़ी तहसील में ढाणी सागड़ू, ग्राम सिहोड़ के रहने वाले हैं। उनके पिताजी डॉ एस पी यादव स्वयं आयुर्वेद रत्न जैसी उपाधि से सज्जित है। उन्होंने बचपन से ही चिकित्सा को सेवा का सर्वप्रथम एवं सर्वसिद्ध साधन माना है। डॉ सिद्धार्थ ये निश्चय कर चुके थे कि उन्हें सेवा चिकित्सा के क्षेत्र में ही करनी है, परंतु प्रारंभ कहां से करें इस पर संशय था। यह संशय तब दूर हुआ जब उन्होंने अपने पिताजी के सामने अपनी बात रखी तो उनके पिताजी ने सीधी बात ना बता कर अंदेशा दे दिया। वह बात थी “सफलता का मूल का ज्ञान नहीं संज्ञान है”। इसके मायने हैं कि ज्ञान सबके पास है परंतु उस ज्ञान का व्यवहारिक जीवन मे प्रयोग करना अनिवार्य है। वहीं से निर्णय हुआ कि यदि चिकित्सा पद्धतियों पर यदि गौर करें तो योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा ही केवल ऐसी पद्धति है जिसका मूल ज्ञान सबको है पर उसे सामान्य जीवन में कैसे अपना आ जाए इसका ध्यान कुछ ने लिया नहीं और कुछ नहीं दिया नहीं।

तब डॉ सिद्धार्थ ने एक संस्था का गठन किया जो केवल और केवल योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का प्रचार प्रसार करें। अखंड प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग सेवा समिति के अधीन ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में निशुल्क शिविर लगाए। इस संस्था में साथ के विद्यार्थियों के साथ आयुर्वेदाचार्य भी सम्मिलित है। डॉ नितेश सैनी, डॉ कुलदीप तोतवानी, डॉ कमलेश जांगिड़ , डॉ संदीप जांगिड़ एवं डॉ अक्षय गुर्जर इस संस्था के पदाधिकारी है।

नवंबर 2018 में आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने विश्व प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर विश्व रिकॉर्ड बनाने के उद्देश्य और संपूर्ण भारतवर्ष में एक ही समय पर लाखों लोगों को मड बाथ करवाने का प्रस्ताव दिया। जिसमें योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं के आवेदन मांगे गए। उस कार्यक्रम में डॉ सिद्धार्थ यादव ने अखण्ड प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग सेवा समिति संस्थान के साथ मिलकर राजस्थान प्रदेश के सीकर संभाग की जिम्मेदारी ली तथा उसका सकारात्मक निर्वहन किया गया। यह विश्व रिकॉर्ड अपने आप में कीर्तिमान इसलिए भी है क्योंकि मड बाथ की पद्धति में एक व्यक्ति में 40 से 55 मिनट लगते हैं तथा इस कार्यक्रम में 363 लोगों को एक ही समय पर मड बाथ दिया गया। 

इसी वर्ल्ड रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए जीनियस फाउंडेशन एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया के द्वारा 2019 में अलग अलग क्षेत्रो में अपने कार्य से पहचान बनाने वाले लोगों को सम्मानित करता रहा है। इस वर्ष संपूर्ण भारतवर्ष में 50 लोगों को अंतिम सूची में स्थान दिया गया जिनमे डॉ सिद्धार्थ भी एक है। डॉक्टर सिद्धार्थ यादव को यह अवार्ड 12 मई 2019 को मुंबई में दिया जाएगा जहां पर बड़ी बॉलीवुड सेलिब्रिटी एवं अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इस अवॉर्ड के बारे में हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें प्रकृति रुचि नही बल्कि उन्हें प्रकृति से प्रेम है।

यह प्रेम उन्हें विरासत में मिला है। उनके दादाजी स्व. धनशीराम जी यादव ने लंबी कानूनी लड़ाई एवं सरकारी हस्तक्षेप से अतिक्रमण की गई जगह को गोचर भूमि घोषित करवाया। गांव के आसपास तालाब का निर्माण करवाया। उन्हें के नक्शे कदम पर चलते हुए डॉ सिद्धार्थ के पिताजी डॉ एस पी यादव ने गत 10 वर्षों से निरंतर पौधारोपण करते रहे है। उनके प्रयासों से अकाल पीड़ित इलाके भी हरे भरे दिखाई देते हैं। पशुओं के लिए और चारे की व्यवस्था भी हो जाती है। साथ ही साथ सरकारी सहयोग से तालाब का निर्माण एवं ट्यूबवेलका निर्माण भी करवाया गया ताकि पशु को पानी उचित व्यवस्था हो सके। डॉ सिद्धार्थ ने बताया कि उनके अवार्ड का श्रेय श्री खाटू श्याम जी के आशीर्वाद एवं उनके पिताजी डॉ एस पी यादव को जाता है क्योंकि वही उनके लिए प्रेरणा एवं वही उनके प्रेरक है।



 

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