जयपुर जलप्रदाय और मलवहन बोर्ड के गठन से समस्या बढ़ेगी: तिवाड़ी

Samachar Jagat | Friday, 07 Sep 2018 04:57:06 PM
Ghanshyam tiwari said Construction of Jaipur water supply and sewerage board will increase the problem

जयपुर। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने राज्य सरकार द्वारा लाए गए जयपुर जलप्रदाय और मलवहन बोर्ड को घातक बताते हुए कहा कि इससे नागरिकों की समस्याएं और बढ़ेगी। घनश्याम तिवाड़ी ने शुक्रवार को सदन में रखे गए इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि जयपुर पहले से ही पेयजल संकट से जूझ रहा है ऐसे में बोर्ड के गठन करने से समस्याएं और अधिक बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जल प्रदाय योजना के तहत जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सफाई व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम और आवास के लिए आवास मंडल जैसी इर्काइयों पहले से ही कार्यरत है और अब सफाई और जलापूर्ति के लिए नया बोर्ड का गठन करना जयपुर की जनता के साथ अन्याय होगा।

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उन्होंने कहा कि जलापूर्ति और सफाई की समस्या केवल जयपुर में ही नहीं बल्कि प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी है ऐसी स्थिति में एक शहर के लिए बोर्ड बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति आदि कई समसस्याएं ऐसी है जिसके बारे में विचार करना होगा। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने जयपुर के सीवरेज के लिए 1400 करोड़ रुपए की योजना मंजूरी के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण को प्रेषित की थी लंकिन राज्य सरकार की द्वेषतापूर्ण नीति के कारण जेडीए ने इसे मंजूर नहीं किया।

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उन्हानें सरकार से मांग की कि इस योजना को मंजूर कर सांगानेर इलाके की जनता को इससे लाभांवित करें। संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि जयपुर में पेयजल और सीवरेज के लिए विभिन्न संस्थाएं है जिनमें आपसी सामंजस्य के अभाव में कई तरह की समस्याएं पैदा होती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए ही अलग से बोर्ड बनाया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि इस बोर्ड के लिए नगर निगम और अन्य संस्थाओं से पांच साल के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी और उनकी सेवा शर्ते, सुविधाओं को यथावत रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे बोर्ड देश के कई महानगरों में भी बने हुए है। उन्होंने कहा कि इन बोर्डों को राज्य सरकार द्वारा समय समय पर अनुदान दिया जाएगा और इन्हें मिलने वाले राजस्व से बोर्ड का संचालन होगा। इससे पूर्व सदन ने तिवाड़ी की ओर से इस विधेयक पर रखे गए परिनियत संकल्प को ध्वनिमत से खारिज कर दिया और विधेयक को पारित कर दिया।
 



 

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