मरीजों को खुले आम जांच व दवा के नाम पर लुटते हुए देखना चाहते हो तो चाकसू अस्पताल जरूर आइए हुजूर

Samachar Jagat | Friday, 08 Nov 2019 04:37:14 PM
If you want to see patients looting in the name of open investigation and medicine, then definitely come to Chaksu Hospital

 


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फकरूद्दीन खान चाकसू

चाकसू। देश और प्रदेश के हाकिमों के द्वारा तय किये गए सरकारी फरमान से बने, कायदे कानून की पीठ पर, खुलेआम खंजर घोंपते हुए किस कदर इन सरकारी आदेशों की निर्लज्जता से धज्जिया उड़ाई जाती है, इसका मंजर यदि देखना हो तो चाकसू के सेटेलाइट अस्पताल में जरुर आइएगा। जी हाँ हम बात कर रहे है चाकसू के सेटेलाइट अस्पताल की, जहाँ पर दूर दराज से अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को जांच व दवा कमीशन के नाम पर धरती के भगवान बन बैठे यमदूत डॉक्टरों द्वारा खुलेआम लुटा जा रहा है। वही इंसान को आज अल्लाह, भगवान के बाद धरती के भगवान डॉक्टरों पर भरोसा है। लेकिन धरती के भगवान की लापरवाही व स्वार्थ के कारण दिन-ब-दिन ये भरोसा टूटता जा रहा है।

  ( कचरे में पड़े आरटी सुनेट इंजेक्शन के खाली रैपर)

 

 जहाँ सूबे के सरकारी अस्पतालों में सरकारी आँकड़े, मरीजों का नि:शुल्क इलाज करनें का दावा करते है, वहीं यह सरकारी दावे और वादे जमीनी हकीकत में खोखले भर नजर आ रहे हैं, लोगों का कहना हैं की सेटेलाइट अस्पताल में हो रही लूट के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत करनें के बाद भी कोई कार्यवाही नही की जाती हैं। वही गुरुवार को जब मीडिया सुबह ग्यारह बजे अस्पताल पहुचा तो डॉक्टर को दिखाकर लोटे कुछ मरीजों से मीडियाकर्मियों नें बातचीत की, तो उन्होंने इसके बारे में खुलासा करते हुए बताया कि अंदर बैठे डॉक्टर सरकारी पर्ची के साथ में एक प्राइवेट पर्ची भी लिख रहे थे। जिसमें महंगी ब्रांडेड कम्पनी की दवाई लिखी गई थी। लेकिन इस सब के बीच जब सरकारी अस्पतालों में खुलेआम मरीजों की जांच व दवा के नाम पर लूट मचनें लगे, तो उसमें सरकारी तन्त्र और सरकार की मंशा पर भी सवालिया निशान लगना लाजमी है, जिसमें सरकारी आंकडें और दावों की भी हवा निकल ही जाती है, ऐसे में ज़रा सोचिये कि, जब दूर दराज से कोई गरीब मरीज़ पहली बार अपनें इलाज के लिए चाकसू सेटेलाइट में पहुँचता होगा तो पहली नजर में उसे जरुर लगता होगा, कि सरकार मुफ्त में ही उनका इलाज करेगी, पर जब खून की जांच से लेकर ब्रांडेड दवा के नाम पर उन्हें लूटा जाता होगा, तो बेबस और गरीब मरीज़ के दिलों दिमाग में सरकार की मंशा को लेकर, क्या तस्वीर उभरती होगी ? उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है, वैसे भी मरीजों की तकलीफे और उनका दर्द कुछ चिकित्सकों के लिए महज कमाई का जरिया बन गया है, जिसके चलते जहाँ प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के शोषण की खुली छूट है, वहीं सरकारी अस्पतालों में मौजूद धरती के भगवान यमदूत बनकर इन मजबूर मरीजो का शोषण करने के लिए उनकी दमड़ी उतारनें में जुटे है, लेकिन इन पर कार्यवाही करने वालो ने आँखे मूंद रखी है।


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कमीशन के चक्कर में सरकारी पर्ची के साथ प्राइवेट पर्ची पर भी डाॅक्टर लिख रहे दवाएं
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सेटेलाइट अस्पताल चाकसू में मरीजों के लिए सभी प्रकार की जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां तक कि प्रत्येक बीमारी की सरकारी दवाएं अस्पताल में मौजूद हैं। पर कमीशनखोरी के चक्कर में अस्पताल के डॉक्टर ही मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अस्पताल के पर्ची पर खानापूर्ति के लिए कुछ सरकारी दवा लिखकर निजी पर्ची पर बाहर की आरटी सुनेट जैसी महंगी दवाएं लिख दी जाती हैं। इन डॉक्टरों को सरकारी जांच पर कतई भरोसा नहीं है। इसलिए बाहर संचालित हो रहे प्राइवेट लैब पर मरीजों को जांच कराने के लिए भेजा जाता है। इस व्यवस्था में मरीजों को सरकारी इलाज से वंचित रखा जा रहा है, वहीं उन्हें महंगा इलाज की खातिर मजबूर किया जाता है।

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नि:शुल्क जांचों के लग रहे रुपए
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चाकसू के सेटेलाइट अस्पताल में लगभग हर बीमारी की जांच पूरी तरह से मुफ्त में की जाती है। वही मरीजों को हीमोग्लोबिन, यूरिन, शुगर, एक्स-रे सहित बड़ी बीमारियों जांच करानी हो तो वह आसानी से अस्पताल में करा सकता है। लेकिन अस्पताल में कुछ डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्हें सरकारी जांचों पर यकीन नहीं है। ग्रामीण इलाकों से सरकारी इलाज की मंशा लेकर आने वाले लोग अस्पताल में भी अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं। स्थिति यह हो गई है कि लोग सेटेलाइट अस्पताल की बजाय अब प्राइवेट क्लीनिकों पर जाने लगे हैं, क्योंकि अस्पताल पहुंचकर मरीजों को वैसे ही बाहर की दवाएं लेनी होती हैं। हालांकि मरीजों के फीस के पैसे बच जाते हैं, इससे भी उन्हें परहेज नहीं है।

 ( अस्पताल में लगी मरीजो की कतार )


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धड़ल्ले से लगा रहे आरटी सुनेट इंजेक्शन
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आरटी सुनेट इंजेक्शन एक ब्रांडेड इंजेक्शन हैं जिसको डॉक्टर बच्चा हो या बुजुर्ग महिला हो या पुरुष बिना किसी जिझक के बे रोक टोक मरीजों को लिखा जा रहा हैं जिसकी कीमत 290 रुपये तक हैं। क्योंकि इस इंजेक्शन में डॉक्टर को कमीशन अछि मिलती हैं। वही जानकारी के अनुसार करीब 40 हजार इंजेक्शन मरीजों को लगा चुके हैं वही इस इंजेक्शन के खतरनाक साइड इफेक्ट भी हैं। लेकिन मोठे कमीशन के चक्कर मे डॉक्टर इन्हें मरीज को लगाने से कोई परहेज नहीं कर रहे हैं।

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  ( सरकारी पर्ची के साथ लिखी गई प्राइवेट पर्ची )


आरटी सुनेट इंजेक्शन के खतरनाक दुस्प्रभाव
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आरटी सुनेट इंजेक्शन लेने से खतरनाक दुष्प्रभाव होते हैं। जानकारी के अनुसार यह इंजेक्शन सीधे लिवर पर अटेक कर सकता हैं। वही जिसके कारण मरीज़ को दस्त एलर्जी, धीमी गति से दिल की धड़कन, पेट में दर्द, एनीमिया, सिरदर्द, लीवर, बुखार , दर्द, चक्कर आना और कम सफेद रक्त कोशिका के स्तर में सूजन शामिल हो सकते हैं। लेकिन फिर भी डॉक्टर कमीशन के चक्कर में इस से परहेज नही कर रहे हैं।

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ड्रेस कोड नही होने से मरीज आ रहे दलाल व लपको के चक्कर में
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अस्पताल में तैनात डॉक्टर व कर्मचारी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।अधिकतर कर्मचारी बिना बिना ड्रेस व बिना आईकार्ड के कार्य कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को ये जानने में मुश्किल होती है कि कौन मरीज है और कौन अस्पताल का डॉक्टर व कर्मचारी। इससे मरीज भटकते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ड्रेस पहनने के नियम बनाए हैं, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों को डॉक्टर के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े,लेकिन अस्पताल में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी नियम को ताक पर रखकर निर्धारित ड्रेस कोड के बिना रहते हैं। इस वजह से मरीज दलालों के चक्कर में भी फंस जा रहे हैं और मजबूरन ही मरीज को महंगा इलाज कराना पड़ता है। इन सबके कारण कई बार मरीज को विवादों का भी सामना करना पड़ता है।

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लपका गिरोह को लेकर  चिकित्सा अधिकारी से की शिकायत
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  ( फ़ोटो सेटेलाइट अस्पताल चाकसू )


अस्पताल में भी लपकों गिरोह का गोरखधंधा भी खूब फलफूल रहा हैं। जिसके कारण लपके मरीजों को बहला फुसलाकर मरीजों को चुना लगा रहे हैं। जिसकी लिखित शिकायत शुक्रवार प्राइवेट मेडिकल कर्मियों ने अस्पताल प्रभारी से की हैं। उन्होंने लिखित शिकायत में आरोप लगाया हैं की आउटडोर व इंडोर में लपका गिरोह सक्रिय हैं। जो अपने हिसाब जरीब मरीजो को बहला फुसलाकर कमीशन के चक्कर में प्राइवेट मेडिकल व लेब पर ले जाते हैं इससे गरीब मरीजों पर अनावश्यक भार पड़ रहा हैं।

बॉक्स 07
इनका कहना हैं जब इस मामले में चाकसू सेटेलाइट अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ रितुराज मीणा से बात की गई तो उन्होंने कहा की इस तरह से कोई डॉक्टर मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहा है तो गलत हैं। ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

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