न्यायालय ने आयोग से मायावती, योगी के विद्वेष फैलाने वाले भाषणों पर कार्रवाई के बारे में पूछा

Samachar Jagat | Monday, 15 Apr 2019 04:25:39 PM
The court asked the commission to take action against Mayawati, Yogi speeches

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रचार के दौरान बसपा प्रमुख मायावती और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्बेष फैलाने वाले भाषणों का सोमवार को संज्ञान लिया और निर्वाचन आयोग से जानना चाहा कि उसने इनके खिलाफ अभ्री तक क्या कार्रवाई की है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। जिसमें चुनाव प्रचार के दौरान जाति एवं धर्म को आधार बना कर विद्बेष फैलाने वाले वाले भाषणों से निबटने के लिए आयोग के पास सीमित अधिकार होने के कथन का अध्ययन करने की सहमति व्यक्त करते हुये मंगलवार को उसके एक प्रतिनिधि को तलब किया है।

पीठ ने निर्वाचन आयोग के इस कथन का उल्लेख किया कि वह जाति और धर्म के आधार पर विद्बेष फैलाने वाले भाषण के लिए नोटिस जारी कर सकता है, इसके बाद परामर्श दे सकता है ओर अंतत: ऐसे नेता के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में शिकायत दर्ज करा सकता है। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग कहता है कि वह दंतविहीन है।

वे कहते हैं कि वे पहले नोटिस जारी करते हैं, फिर परामर्श देते हैं और फिर शिकायत दर्ज करते हैं। पीठ ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह के विद्बेष फैलाने वाले भाषणों से निबटने के आयोग के अधिकार से संबंधित पहलू पर वह गौर करेगी। सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने कहा कि मायावती और योगी आदित्यनाथ के कथित नफरत फैलाने वाले भाषणों के कारण उनके खिलाफ पहले ही नोटिस जारी किये हैं।

पीठ ने कहा कि हमें बतायें आपने मायावती और आदित्यनाथ के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। साथ ही पीठ ने इस मामले को मंगलवार को लिये सूचीबद्ध कर दिया। पीठ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में शारजाह के रहने वाले प्रवासी भारतीय योग प्रशिक्षक हरप्रीत मनसुखानी की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

अपनी याचिका में उन्होंने आम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं के मीडिया में धर्म एवं जाति के आधार पर की जाने वाली टिप्पणियों पर चुनाव आयोग को कड़े कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है। याचिका में शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है जो पूरी चुनाव प्रक्रिया पर पैनी निगाह रखने के साथ ही निर्वाचन आयोग की ईमानदारी की भी परख करे। 



 

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