इटावा में भूजल स्तर गिरने से हो सकता है पानी का बड़ा संकट

Samachar Jagat | Monday, 22 Jul 2019 12:31:14 PM
Water crisis in Etawah may be biggest problem of water

इटावा। चंबल से जुड़े हुए उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में लगातार भूजल स्तर गिरने से भविष्य में जल संटक का सामना करना पड़ सकता है। इटावा स्थिति जल निगम के अधिशाषी अभियंता जगदीश बाबू ने सोमवार को यहां बताया कि लगातार भूजल का दोहन होने से इटावा जिले में वर्ष 1993 से जल स्तर में गिरावट आना शुरू हो गयी थी।

उन्होंने बताया कि जल स्तर में गिरावट रूकने का नाम नही ले रही है। भविष्य में जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ताखा जैसे कुछ क्षेत्रों में पिछले वर्षों में जल स्तर में सुधार भी हुआ है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में समर पंप डेढ़ सौ फीट नीचे तक लगाए जा रहे हैं तब पानी मिल रहा है। यही स्थिति जसवंतनगर, चकरनगर जैसे क्षेत्रों की भी है।

जल स्तर नीचे गिरते जाने के कारण पहले से लगाए गए तमाम हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। जागरुकता की कमी के कारण पानी बचाने का कार्य सफल नही हो पा रहा है। जागरूक लोगों का मानना है कि यदि समरपम्पों से ही पानी की बर्वादी रूक जाए तो काफी पानी बचाया जा सकता है।

अधिकारिक सूत्रो के अनुसार इटावा जिले मे साल 1999 में जसंवतनगर ब्लाक मे भूजल का स्तर 20 से लेकर 30 फीट तक भूजल था वही साल 2009 मे भूजल का आंकडा बढ कर 60 से लेकर 70 फुट तक जा पहुंचा। इसी तरह से बसरेहर ब्लाक मे 1999 में दस से 20 फुट तक, 2009 मे 30 से 40 फुट तक और 2019 मे 60 से 65 फुट नीचे तक भूजल पहुच गया है।

महेवा ब्लाक मे 1999 में 20 से 30 फुट, 2009 में 40 से 50 और 2019 में 50 से 60 फुट तक जा पहुंचा है। सैफई ब्लाक में 1999 में 10 से 20, 2009 में 35 से 45 और 2019 में 50 से 60 फुट तक भूजल गिर गया है। बढपुरा ब्लाक में 1999 में 45 से 50, 2009 में 35 से 45 और 2019 में 60 से 65 तक भूजल गिरा।

उन्होंने बताया कि ताखा ब्लाक में 1999 में 10 से 15, 2009 में 35 से 45 और 2019 में 25 से 30 फुट तक भूजल गिरा। भर्थना ब्लाक में 1999 में 25 से 35, 2009 मे 40 से 45 और 2019 में 45 से 55 फुट तक भूजल गिरा। चकरनगर ब्लाक में 1999 मे 40 से 50 फुट,2009 में 30 से 40 फुट और 2019 में 65 से 75 फुट तक भू जल गिर गया है।



 

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