Death anniversary: मोहम्मद रफी की जिंदगी का वो वक्त जब लता मंगेश्कर से हो गई थी अनबन....पढ़े क्या था पूरा माजरा

Samachar Jagat | Tuesday, 31 Jul 2018 11:42:11 AM
Mohammed Rafi Death anniversary

मुंबई। आवाज की दुनिया के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी को पार्श्वगायन करने की प्रेरणा एक फकीर से मिली थी। रफी एक फकीर के गीतों को सुना करते थे जिससे उनके दिल में संगीत के प्रति एक अटूट लगाव पैदा हो गया। रफी के बड़े भाई हमीद ने मोहम्मद रफी के मन में संगीत के प्रति बढ़ते रूझान को पहचान लिया था और उन्हें इस राह पर आगे बढऩे मे प्रेरित किया। लाहौर में रफी संगीत की शिक्षा उस्ताद अब्दुल वाहिद खान से लेने लगे और साथ हीं उन्होंन गुलाम अली खान से भारतीय शास्त्रीय संगीत भी सीखना शुरू कर दिया।

एक बार हमीद रफी को लेकर के.एल.सहगल संगीत के कार्यक्रम में गये लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण के.एल.सहगल ने गाने से इंकार कर दिया। हमीद ने कार्यक्रम के संचालक से गुजारिश की वह उनके भाई रफी को गाने का मौका दें। संचालक के राजी होने पर रफी ने पहली बार 13 वर्ष की उम्र मे अपना पहला गीत स्टेज पर दर्शकों के बीच पेश किया। दर्शकों के बीच बैठे संगीतकार श्याम सुंदर को उनका गाना अच्छा लगा और उन्होनें रफी को मुंबई आने के लिये न्यौता दिया। श्याम सुदंर के संगीत निर्देशन में रफी ने अपना पहला गाना .सोनिये नी हिरीये नी पार्श्वगायिका जीनत बेगम के साथ एक पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिए गाया।

जन्मदिन विशेष: महज 12 साल की उम्र में अभिनेत्री मुमताज ने रखा था बॉलीवुड में कदम

रफी अपने संपूर्ण सिने करियर में लगभग 700 फिल्मों के लिये 26000 से भी ज्यादा गीत गाये।मोहम्मद रफी फिल्म इंडस्ट्री में मृदु स्वाभाव के कारण जाने जाते थे लेकिन एक बार उनकी कोकिल कंठ लता मंगेश्कर के साथ अनबन हो गई थी। मोहम्मद रफी ने लता मंगेशकर के साथ सैकड़ों गीत गाये थे लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब रफी ने लता से बातचीत तक करनी बंद कर दी थी। लता मंगेशकर गानों पर रॉयल्टी की पक्षधर थीं जबकि रफी ने कभी भी रॉयल्टी की मांग नहीं की।

रफी साहब मानते थे कि एक बार जब निर्माताओं ने गाने के पैसे दे दिए तो फिर रॉयल्टी किस बात की मांगी जाए। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा कि मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के बीच बातचीत भी बंद हो गई और दोनों ने एक साथ गीत गाने से इंकार कर दिया हालांकि चार वर्ष के बाद अभिनेत्री नरगिस के प्रयास से दोनों ने एक साथ एक कार्यक्रम में दिल पुकारे गीत गाया। मोहम्मद रफी ने हिन्दी फिल्मों के अलावे मराठी और तेलगू फिल्मों के लिये भी गाने गाये। मोहम्मद रफी अपने करियर में 06 बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किये गये। वर्ष 1965 मे रफी पदमश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये।

मोहम्मद रफी.बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े प्रशंसक थे। मोहम्मद रफी फिल्म देखने के शौकीन नही थे लेकिन कभी-कभी वह फिल्म देख लिया करते थे। एक बार रफी ने अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार देखी थी। दीवार देखने के बाद रफी अमिताभ के बहुत बड़े प्रशंसक बन गये। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म नसीब में रफी को अमिताभ के साथ युगल गीत..चल चल मेरे भाई..गाने का अवसर मिला।

अमिताभ के साथ इस गीत को गाने के बाद रफी बेहद खुश हुये थे। जब रफी साहब अपने घर पहुंचे तो उन्होंने अपने परिवार के लोगो को अपने पसंदीदा अभिनेता अमिताभ के साथ गाने की बात को खुश होते हुये बताया था। अमिताभ के अलावा रफी को शम्मी कपूर और धर्मेन्द्र की फिल्में भी बेहद पसंद आती थी।मोहम्मद रफी को अमिताभ -धर्मेन्द्र की फिल्म शोले बेहद पंसद थी और उन्होंने इसे तीन बार देखा था।

इस बायोपिक फिल्म में काम कर सकती है अभिनेत्री तापसी पन्नू, पहली बार पर्दे पर निभाएंगी ऐसा किरदार

30 जुलाई 1980 को आस पास फिल्म के गाने शाम क्यू उदास है दोस्त गाने के पूरा करने के बाद जब रफी ने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से कहा शूड आई लीव जिसे सुनकर लक्ष्मीकांत प्यारे लाल अचंभित हो गये क्योंकि इसके पहले रफी ने उनसे कभी इस तरह की बात नही की थी।अगले दिन 31 जुलाई 1980 को रफी को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को हीं छोड़कर चले गये।

बिहार के गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह पर बनने वाली बायोपिक फिल्म का निर्देशन करेंगे प्रकाश झा

खुलासा: फिल्म भारत में सलमान खान की हिरोइन बनेगी ये बॉलीवुड एक्ट्रेस



 
loading...
रिलेटेड न्यूज़
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.