स्क्रिप्ट लिखवाने आमिर को खंडाला ले गए थे नासिर हुसैन, गीतकार की सलाह ने बना दिया कयामत से कयामत का हीरो

Samachar Jagat | Monday, 02 Sep 2019 01:27:21 PM
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इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड में एक्टर बनना कोई आसान काम नहीं है। बी टाउन में कब किसका सितारा चमक जाए और कौन भूला बिसरा एक किस्सा बनकर रह जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। फिल्मी दुनिया के कई ऐसे सितारे हैं जिनके करियर के सफर के पीछे कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें सुनकर दर्शक रोमांचित भी होते हैं और अचम्भित भी।


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लेकिन,यह किस्से उनके पसंदीदा सितारे के फैंस का मनोबल भी बढ़ाते हैं और इस बात का संदेश भी देते हैं कि अगर इंसान को अपनी मेहनत और किस्मत पर भरोसा हो और वह अपने दृढ़ विश्वास के साथ अपनी मंजिल की तरफ बिना डरे और निराश हुए निरंतर आगे बढ़ता रहे तो एक दिन उसे मंजिल जरूर मिल जाती है। आज हम आपको एक ऐसा ही किस्सा बताने जा रहे हैं। जो बॉलीवुड के सुपरस्टार और मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान से जुड़ा है। बात उस वक्त की जब एक्टर आमिर खान के ताऊ यानि बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर, प्रोड्यूसर नासिर हुसैन अपनी नई फिल्म की तैयारी कर रहे थे।

फिल्म की कहानी पर काम करने के लिए वह शहर से दूर शांत वातावरण में खंडाला पहुंचे। जिस होटल में नासिर साहब रुके हुए थे वहीं मशहूर कहानीकार ओर गीतकार जावेद अख्तर भी मौजूद थे। जब उन्हें पता चला कि नासिर साहब यहां मौजूद हैं तो वह उनसे मिलने उनके कमरे में जा पहुंचे। जावेद अख्तर को देखकर नासिर साहब ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, इसी दौरान जावेद अख्तर ने देखा कि कमरे के एक कोने में एक नौजवान युवक कुर्सी टेबल पर बैठकर कुछ लिख रहा है। जावेद ने पूछा नासिर साहब यह कौन है। नासिर साहब ने मुस्कुराते हुए कहा यह अपने ताहिर (नासिर हुसैन के छोटे भाई और आमिर के पिता) का बेटा है आमिर।

नासिर हुसैन ने आगे कहा, मैं नई फिल्म की कहानी पर काम कर रहा हूं, इसलिए इसको साथ ले आया। इस बहाने फिल्म निर्माण और पटकथा से जुड़ी कुछ बारीकियां यह भी सीख जाएगा। इतना सुनते ही जावदे अख्तर ने आमिर खान को गौर से देखा और बोले नासिर साहब आप इसको पर्दे के पीछे काम मत सिखाइये इससे तो आप एक्टिंग करवाइये। आप इसको फिल्म का हीरो बनाइये। जावेद अख्तर के मुंह से अचानक यह बात सुनकर नासिर साहब दो मिनट के लिए चुप हो गए, फिर आमिर की तरफ मुखातिक होकर बोले, आमिर सुना, जावेद साहब क्या कह रहे हैं। आमिर खान ने एक नजर दोनो को देखा ओर अपनी मासूम मुस्कुराहट के साथ गर्दन झुकाकर फिर से अपने काम में जुट गए।

लेकिन, यह बात नासिर हुसैन के दिल में घर कर चुकी थी कि क्या आमिर को वाकई में आने वाली फिल्म के लिए हीरो के रूप में बड़े पर्दे पर उतार देना चाहिए। थोड़ी देर बाद जावेद साहब यह सलाह देकर और इधर उधर की बातचीत करके वहां से चले गए। लेकिन, नासिर यह बात सोचते रहे। खैर, नासिर साहब ने घर में सभी से सलाह मश्विरा किया। लेकिन, आमिर के पिता ताहिर ने इसका थोड़ा विरोध किया। लेकिन, थोड़े विरोध के बाद वह भी मान गए ओर आमिर खान को फिल्म के लिए हीरो के रूप में लांच करने की तैयारी हो गई। यह किस्सा जावेद अख्तर ने एक  कार्यक्रम के मंच पर दर्शकों के बीच सुनाया था। वहां मौजूद आमिर खान भी  इस किस्से को सुनकर मुस्कुराए और कहा यह बात बिल्कुल सही है।

यह किस्सा सुनकर दर्शक भी अचम्भित हो उठे। यह फिल्म थी कयामत से कयामत तक, जो 1988 में रिलीज हुई थी।  आमिर खान इस फिल्म से ही फिल्म इंडस्ट्री पर छा गए थे। हालांकि, आमिर खान सबसे पहले होली फिल्म में नजर आए थे। लेकिन, इस फिल्म से उन्हें ज्यादा चर्चा नहीं मिली। आमिर खान के साथ जूही चावला ने भी हिन्दी फिल्मों में अपना डेब्यू किया था। आमिर खान के निर्देशक ताऊ के बेटे मंसूर खान ने भी निर्देशन के क्षेत्र में इसी फिल्म से कदम रखा थ। इस फिल्म के बाद आमिर खान का करियर बतौर एक्टर शुरु हो गया था। आज आमिर खान कहां है आपको बताने की जरूरत नहीं है। आमिर खान के एक्टर बनने में यह किस्सा बहुत ही मददगार साबित हुई। जावेद अख्तर किसी ना किसी बहाने से आमिर खान के लिए इस मंजिल तक पहुंचने में बहुत मददगार साबिह हुए।



 

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