पुण्यतिथि विशेष: रूमानी गीतों से दीवाना बनाया था अंजान ने

Samachar Jagat | Thursday, 13 Sep 2018 09:30:01 AM
Anjaan death anniversary special

मुंबई। लगभग तीन दशक से अपने रचित गीतों से हिन्दी फिल्म जगत को सराबोर करने वाले गीतकार अंजान के रूमानी नज्म आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेते है। अंजान इस अक्टूबर 1930 को बनारस मे जन्में अंजान को बचपन के दिनो से हीं उन्हे शेरो शायरी के प्रति गहरा लगाव था। अपने इसी शौक को पूरा करने के लिए वह बनारस मे आयोजित सभी कवि सम्मेलन और मुशायरों के कार्यक्रम में हिस्सा लिया करते थे, हालांकि मुशायरों के कार्यक्रम में भी वह उर्दू का इस्तेमाल कम हीं किया करते थे। जहां हिन्दी फिल्मों में उर्दू का इस्तेमाल एक पैशन की तरह किया जाता था।

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वही अंजान अपने रचित गीतों मे हिन्दी पर ही ज्यादा जोर दिया करते थे। गीतकार के रूप मे उन्होने अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1953 में अभिनेता प्रेमनाथ की फिल्म गोलकुंडा का कैदी से की। इस फिल्म के लिए सबसे पहले उन्होनें लहर ये डोले कोयल बोले.और शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी गीत लिखा, लेकिन इस फिल्म के जरिए वह कुछ खास पहचान नही बना पाए। अंजान ने अपना संघर्ष जारी रखा। इस बीच उन्होंने कई छोटे बजट फिल्में भी की जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ। अचानक ही उनकी मुलाकात जी.एस.कोहली से हुई जिनके संगीत निर्देशन मे उन्होंने फिल्म लंबे हाथ के लिए मत पूछ मेरा है मेरा कौन गीत लिखा।

इस गीत के जरिए वह काफी हद तक पहचान बनाने मे सफल हुए। लगभग दस वर्ष तक मायानगरी मुंबई मे संघर्ष करने के बाद वर्ष 1963 मे पंडित रविशंकर के संगीत से सजी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान पर आधारित फिल्म गोदान में उनके रचित गीत चली आज गोरी पिया की नगरिया की सफलता के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। गीतकार अंजान को इसके बाद कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए, जिनमें बहारे फिर भी आएगी, बंधन, कब क्यों और कहां, उमंग, रिवाज, एक नारी एक ब्रह्मचारी, हंगामा, जैसी कई फिल्में शामिल है। साठ के दशक में अंजान ने संगीतकार श्याम सागर के संगीत निर्देशन में कई गैर फिल्मी गीत भी लिखे।

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अंजान द्बारा रचित इन गीतो को बाद में मोहम्मद रफी, मन्ना डे और सुमन कल्याणपुरी जैसे गायकों ने अपना स्वर दिया, जिनमें मोहम्मद रफी द्बारा गाया गीत मैं कब गाता काफी लोकप्रिय भी हुआ था। अंजान ने कई भोजपुरी फिल्मो के लिए भी गीत लिखे। सत्तर के दशक में बलम परदेसिया का गोरकी पतरकी के मारे गुलेलवा गाना आज भी लोगो के जुबान पर चढ़ा हुआ है। अंजान के सिने कैरियर पर यदि नजर डाले तो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन पर फिल्माए उनके रचित गीत कापी लोकप्रिय हुआ करते थे। वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म दो अंजाने के लुक छिप लुक छिप जाओ ना गीत की कामयाबी के बाद अंजान ने अमिताभ बच्चन के लिए कई सफल गीत लिखे जिनमें बरसो पुराना ये याराना, खून पसीने की मिलेगी तो खाएंगे, रोते हुए आते है सब, ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना, खइके पान बनारस वाला जैसे कई सदाबहार गीत शामिल है।

अमिताभ बच्चन के अलावा मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों के लिए भी अंजान ने सुपरहिट गीत लिखकर उनकी फिल्मों को सफल बनाया है। इन फिल्मों में डिस्को डांसर, डांस डांस, कसम पैदा करने वाले, करिश्मा कुदरत का, कमांडो, हम इंतजार करेंगे, दाता और दलाल आदि फिल्में शामिल है। जाने माने निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्मों के लिए अंजान ने गीत लिखकर उनकी फिल्मो को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी सदाबहार गीतों के कारण ही प्रकाश मेहरा की ज्यादातार फिल्मे अपने गीत-संगीत के कारण ही आज भी याद की जाती है। अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याण जी आनंद जी का नाम सबसे उपर आता है। अंजान ने अपने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे सिने कैरियर में लगभग 200 फिल्मों के लिए गीत लिखे। लगभग तीन दशकों तक हिन्दी सिनेमा को अपने गीतों से संवारने वाले अंजान 67 वर्ष की आयु मे 13 सितम्बर 1997 को सबको अलविदा कह गए। अंजान के पुत्र समीर ने बतौर गीतकार फिल्म इंडस्ट्री ने अपनी खास पहचान बनाई है।- एजेंसी



 

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