अनुराग कश्यप का कहना, 'फिल्म कोई चैरिटी या एनजीओ नहीं होती'

Samachar Jagat | Thursday, 11 Jan 2018 01:30:01 PM
Anurag Kashyap said Film is not a charity or NGO

नई दिल्ली। सामाजिक संदेश देने वाली फिल्में उद्योग में फिलहाल चलन में भले हों लेकिन फिल्मकारों से फिल्मों के जरिए संदेश देने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह कहना है निर्देशक अनुराग कश्यप का। उनकी आगामी फिल्म मुक्काबाज खेलों को बढ़ावा देती है। हालांकि फिल्मकार का कहना है कि किसी सामाजिक मुद्दे का समाधान पेश करना कभी भी उनका लक्ष्य नहीं रहा।

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कश्यप ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, फिल्में संदेश देने के लिए नहीं होती। फिल्म कोई चैरिटी या एनजीओ नहीं होती। हम लंबे समय से प्रेम कहानियां बनाते आ रहे हैं लेकिन लोग अब भी नहीं जानते कि प्रेम कैसे करना चाहिए। फिल्म संदेश देती भी है तो लोग एक पल के लिए तालियां बजाते हैं लेकिन बाद में भूल जाते हैं। एक फिल्मकार होने के नाते मैं संदेश देने में विश्वास नहीं करता। मैंने केवल एक बार अपनी फिल्म में संदेश दिया था। वह फिल्म थी ब्लैक फ्राइडे।

निर्देशक ने कहा कि फिल्म मुक्काबाज खेलों के समर्थन में हो सकती है लेकिन यह मुक्केबाजी का विज्ञापन नहीं है। उन्होंने कहा, यह फिल्म हमें आईना दिखाती है। लोग इससे क्या सीखते हैं यह तो उनपर निर्भर करता है।

सीबीएफसी ने फिल्म को यूाए प्रमाण पत्र दिया है। कश्यप ने सेंसर बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी की कल प्रशंसा की थी और उनके साथ अपने अनुभव को तर्कसंगत, विवेकपूर्ण और समर्थ बनाने वाला बताया। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत में बदलाव करने के लिए सीबीएफसी की आलोचना हुई थी। लेकिन कश्यप ने कहा कि प्राधिकरण के पक्ष या विरोध में वह अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर बोलने में ही विश्वास करते हैं।

उन्होंने कहा, पद्मावत में बदलाव का सीबीएफसी के साथ मेरा व्यक्तिगत अनुभव नहीं है। सेंसर बोर्ड के साथ मेरे निजी अनुभव हैं। प्रसून के साथ यह मेरा पहला अनुभव था और मुझे वाकई में वह सम्मान और स्थान दिया गया जो एक फिल्मकार को मिलना चाहिए। मुझे मेरी फिल्म में कुछ चीजों के संदर्भ को बताने का मौका दिया गया, इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।

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कश्यप ने कहा, यह केवल भंसाली जानते हैं कि पद्मावती के साथ क्या हुआ। इस बार मेरा व्यक्तिगत अनुभव बहुत बढय़िा रहा। मैंने हमेशा से कहा है कि सीबीएफसी फिल्म को काटने के लिए नहीं है। मै आज भी इसी बात में विश्वास करता हूं और हम उस दिशा की ओर बढ़ भी रहे हैं। यह एक लंबी प्रक्रिया होगी। उन्होंने कहा कि सीबीएफसी प्रमुख के पद को संभालना आसान नहीं है वह खुद उस स्थिति में कभी नहीं पडऩा चाहते।

कश्यप ने कहा, प्रसून जिस पद पर हैं उस पद पर रहना कोई आसान बात नहीं है। उन पर कई चीजों के आरोप लगेंगे और अंत में वह कई दोस्तों को खो देंगे। मैं ऐसे पद पर कभी नहीं आना चाहता। कुछ गलत होगा तो मैं उसकी आलोचना करूंगा लेकिन अगर कुछ अच्छा होता है तो मुझे उसकी प्रशंसा भी करनी चाहिए।- एजेंसी

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