BIRTHDAY SPECIAL: अपनी दिलकश आवाज से करोड़ों दिल पर राज करने वाली आशा भोंसले ने की थी 16 की उम्र में शादी

Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 09:03:31 AM
Asha Bhosle birthday special

मुम्बई। अपनी आवाज की कशिश के लिए विख्यात आशा भोंसले अनेक नए प्रयोगों के साथ पिछले छह दशक में सिने जगत को 12 हजार से अधिक दिलकश और मदहोश करने वाले गीत दे चुकी हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी बंगाली गुजराती पंजाबी तमिल मलयालम और अंग्रेजी भाषा के भी अनेक गीत गाए हैं। आठ सितम्बर 1933 महाराष्ट्र के सांगली गांव में जन्मी आशा भोंसले के पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर मराठी रंगमंच से जुडे हुए थे। नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही आशा के सिर से पिता का साया उठ गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी को उठाते हुए आशा और उनकी बहन लता मंगेश्कर ने फिल्मों में अभिनय के साथ साथ गाना भी शुरू कर दिया।आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में 'सावन आया' फिल्म चुनरिया में गाया। सोलह वर्ष की उम्र मे अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाते हुए आशा ने अपनी उम्र से काफी बड़े गणपत राव भोंसले से शादी कर ली।

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उनकी वह शादी ज्यादा सफल नहीं रही और अंतत: उन्हे मुंबई से वापस अपने घर पुणे आना पड़ा। उस समय तक गीतादत्त, शमशाद बेगम और लता मंगेश्कर फिल्मो में बतौर पाश्र्वगायिका अपनी धाक जमा चुकी थी। वर्ष 1957 में संगीतकार ओ.पी.नैय्यीर के संगीत निर्देशन में बनी निर्माता-निर्देशक बी.आर.चोपड़ा की फिल्म नया दौर आशा भोंसले के सिने कैरियर का अहम पड़ाव लेकर आई। वर्ष 1966 मे तीसरी मंजिल मे आशा भोंसले ने आर.डी.बर्मन के संगीत में 'आजा आजा मैं हू प्यार तेरा' गाना को अपनी आवाज दी जिससे उन्हे काफी प्रसिद्धि मिली। साठ और सत्तर के दशक मे आशा भोंसले हिन्दी फिल्मों की प्रख्यात नर्तक अभिनेत्री हेलन की आवाज समझी जाती थी।

आशा भोंसले ने हेलन के लिए तीसरी मंजिल में 'ओ हसीना जुल्फों वाली', कारवां में 'पिया तू अब तो आजा', मेरे जीवन साथी में 'आओ ना गले लगा लो' ना और डॉन में 'ये मेरा दिल यार का दीवाना' गीत गाया। शास्त्रीय संगीत से लेकर पाश्चात्य धुनों पर गाने मे महारत हासिल करने वाली आशा भोंसले ने वर्ष 1981 मे प्रदर्शित फिल्म उमराव जान से अपने गाने के अंदाज मे परिवर्तन किया। फिल्म उमराव जान से आशा भोंसले एक कैबरे सिंगर और पॉप सिंगर की छवि से बाहर निकली और लोगों को यह अहसास हुआ कि वह हर तरह के गीत गाने मे सक्षम है। उमराव जान के लिए आशा ने 'दिल चीज क्या है' और 'इन आंखो की मस्ती के' जैसी गजलें गाकर आशा को खुद भी आश्चर्य हुआ कि वह इस तरह के गीत गा सकती है।

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इस फिल्म के लिए उन्हे अपने कैरियर का पहला नेशनल अवार्ड भी मिला। 1994 मे अपने पति आर डी बर्मन की मौत से आशा भोंसले को गहरा सदमा लगा और उन्होने गायिकी से मुंह मोड़ लिया लेकिन उनकी जादुई आवाज आखिर दुनिया से कब तक मुंह मोड़े रहती। उनकी आवाज की आवश्यकता हर संगीतकार को थी। कुछ महीनों की खामोशी के बाद संगीतकार ए.आर.रहमान ने इसकी पहल की। रहमान को अपने रंगीला फिल्म के लिए आशा की आवाज की जरूरत थी। उन्होने 1995 में 'तन्हा तन्हा' गीत फिल्म रंगीला के लिए गाया। आशा के सिने कैरियर मे यह एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया और उसके बाद उन्होने आजकल की धूम धड़ाके से भरे संगीत की दुनिया में कदम रख दिया।

आशा भोंसले को बतौर गायिका आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिल चुके है। आशा भोंसले को वर्ष 2001 मे फिल्म जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व उन्हें उमराव जान और इजाजत में उनके गाए गीतों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया। आज रिमिक्स गीतों के दौर मे बनाए गए गानो पर यदि एक नजर डाले तो पाएंगे कि उनमे से अधिकांश नगमें आशा भोंसले ने ही गाए थे। इन रिमिक्स गानों मे पान खाए सइयां हमार पर्दे मे रहने दो, जब चली ठंडी हवा, शहरी बाबू दिल लहरी बाबू, झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में, काली घटा छाए मोरा जिया घबराए, लोगों न मारो इसे, कह दूं तुम्हें या चुप रहूं और मेरी बेरी के बेर मत तोड़ो जैसे सुपरहिट गीत शामिल है।

आशा भोंसले ने हिन्दी फिल्मी गीतों के अलावा गैर फिल्मी गाने गजल, भजन और कव्वालियो को भी बखूबी गाया है। जहां एक ओर संगीतकार जयदेव के संगीत निर्देशन में जयशंकर प्रसाद और महादेवी वर्मा की कविताओ को आशा ने अपने स्वर से सजाया है वही फिराक गोरखपुरी और जिगर मुरादाबादी के रचित कुछ शेर भी गाये है। जीवन की सच्चाइयो को बयान करती जिगर मुरादाबादी की गजल मैं चमन में जहां भी रहूं मेरा हक है फसले बहार पर उनके जीवन को भी काफी हद तक बयां करती है।- एजेंसी



 

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