जन्मदिवस विशेष: इस तरह बनी मीना कुमारी हिंदी सिनेमा जगत की 'ट्रेजडी क्वीन'

Samachar Jagat | Wednesday, 01 Aug 2018 12:16:13 PM
Bollywood tragedy Queen Meena Kumari Birthday Special

एंटरटेनमेंट डेस्क। हिंदी सिनेमा में एक दौर उन अभिनेत्रियों का भी रहा है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से ना सिर्फ अभिनय को नया आयाम दिया बल्कि अपनी रुमानी अदाओँ से दर्शकों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाई हैं। उस दौर की अभिनेत्रियों में से मीना कुमारी का नाम भी शामिल है जिन्होंने अपने अभिनय से करीब तीन दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। मीना कुमारी ने फिल्मी पर्दे पर एक से बढ़कर एक किरदार अदा किए हैं। जिन्होंने उन्हें हिंदी सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन का दर्जा दिया। 

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आज उनके जन्मदिन के अवसर पर आइए एक नजर डालते है उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातों पर। मीरा का जन्म 1 अगस्त 1932 में मुंबई में मास्टर अली बक्श के घर हुआ। उनका असली नाम महजबीं था। बॉलीवुड में मीरा को बतौर अभिनेत्री की पहचान फिल्म बैजू बावरा से मिली। जो टिकट खिड़की पर सफल साबित हुई। इस फिल्म के बाद मीना ने कई फिल्मों में काम किया। फिल्म इंडस्ट्री में मीरा कुछ सालों बाद ही सफल अभिनेत्री के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही। उस दौर में लगभग मीना ने कई बड़े स्टार के साथ फिल्मों में काम किया।

कमाल अमरोही से शादी

मीना ने अपने सिने सफर के दौरान 1952 में उस दौर के जाने माने निर्देशक कमाल अमरोही के साथ शादी की थी। मीना और कमाल का रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों अलग हो गए। 

ऐसे कहलाई ट्रेजडी क्वीन

मीना ने अपने सिने सफर में कई फिल्मों में काम किया। जिन्हें ना सिर्फ दर्शकों का प्यार मिला बल्कि अपने दमदार अभिनय के कारण मीना को प्रशंसा भी मिली। 1962 में मीना की कई महत्वपूर्ण फिल्में रिलीज हुई। जिनमें आरती, मैं चुप रहूंगी और साहिब बीबी और गुलाम जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों के लिए मीना सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नॉमिनेट की गई। फिल्म फेयर के इतिहास मे ये पहला ऐसा मौका था जहां एक अभिनेत्री को फिल्म फेयर के तीन नोमिनेशन मिले थे।

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मीना कुमारी के अपने फिल्में सफर में ज्यादातर ऐसी फिल्मों में काम किया है जिनमें उनका किरदार बेबस महिला, और पर्दे पर रोने धोने वाला ही होता था। अपनी ज्यादातर फिल्मों में इस छवि के कारण ही वे हिंदी सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन कहलाने जाने लगी। 

शोहरत की बुलंदिया छुने वाली मीना जिंदगीभर रही तन्हा

मीना भले ही उस दौर की सफल अभिनेत्रियों में शामिल थी। लेकिन वे जिंदगीभर एक सच्चे प्यार की तलाश करती रही। बेहद कम लोग जानते है कि मीना को कविताएं लिखने का शौक था। मीना कुमारी ने अपनी वसीयत में अपनी कविताएं छपवाने का जिम्मा गुलजार को दिया जिसे उन्होंने .नाज. उपनाम से छपवाया।

लगभग तीन दशक तक अपने संजीदा अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाली हिन्दी सिने जगत की महान अभिनेत्री मीना कुमारी 31 मार्च 1972 को सदा के लिए अलविदा कह गई।

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