जन्मदिवस विशेष: बॉलीवुड के 'ही मैन' बनने के लिए धर्मेंद्र को देखने पड़े थे ऐसे दिन...

Samachar Jagat | Friday, 08 Dec 2017 09:53:18 AM
Dharmendra Birthday Special

मुंबई। बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को अपना दीवाना बनाने वाले अभिनेता धर्मेन्द्र को अपने सिने करियर के शुरूआती दौर में वह दिन भी देखना पड़ा था जब निर्माता-निर्देशक उनसे यह कहते आप बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री के लिए उपयुक्त नही हैं और आपको अपने गांव वापस लौट जाना चाहिए। आज उनके जन्मदिन पर आइए एक नजर डालते है उनके जीवन के दिलचस्प किस्सो पर।

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पंजाब के फगवारा में आठ दिसंबर 1935 को जन्मे धर्मेन्द्र का रूझान बचपन के दिनों से ही फिल्मों की ओर था और वह अभिनेता बनना चाहते थे। फिल्मों की ओर उनकी दीवानगी का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि फिल्म देखने के लिये वह मीलो पैदल चलकर शहर जाते थे। फिल्म अभिनेत्री सुरैय्या के वह इस कदर दीवाने थे कि उन्होंने वर्ष 1949 में प्रदर्शित फिल्म दिल्लगी चालीस बार देख डाली थी।

वर्ष 1958 में फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर पत्रिका फिल्म फेयर का एक विज्ञापन निकाला जिसमें नये चेहरों को बतौर अभिनेता काम देने की पेशकश की गयी थी। धर्मेन्द्र इस विज्ञापन को पढक़र काफी खुश हुये अमेरीकन टयूबबैल में अपनी नौकरी को छोडक़र अपने सपनों को साकार करने के लिये मायानगरी मुंबई आ गये। मुंबई आने के बाद धर्मेन्द्र को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता काम पाने के लिये वह स्टूडियों दर स्टूडियों भटकते रहे। वह जहां भी जाते उन्हें खरी खोटी सुननी पड़ती। धर्मेन्द्र चूंकि विवाहित थे अत कुछ निर्माता उनसे यह कहते कि यहां तुम्हे काम नहीं मिलेगा। कुछ लोग उनसे यहां तक कहते तुम्हें अपने गांव लौट जाना चाहिए और वहां जाकर फुटबॉल खेलना चाहिये लेकिन धर्मेन्द्र उनकी बात को अनसुना कर अपना संघर्ष जारी रखा।

इसी दौरान धर्मेन्द्र की मुलाकात निर्माता-निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी से हुई जिन्होंने धर्मेन्द्र की प्रतिभा को पहचान अपनी फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में बतौर अभिनेता काम करने का मौका दिया लेकिन फिल्म की असफलता ने धर्मेन्द्र को गहरा धक्का लगा और एक बार उन्होंने यहां तक सोच लिया कि मुंबई में रहने से अच्छा है गांव लौट जाया जाये। बाद में धर्मेन्द्र ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिये संघर्ष करना शुरू कर दिया।

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फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे की असफलता के बाद धर्मेन्द्र ने माला सिन्हा के साथ अनपढ़, पूजा के फूल, नूतन के साथ बंदिनी, मीना कुमारी के साथ काजल जैसी कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों को दर्शकों ने पसंद तो किया लेकिन कामयाबी का श्रेय बजाये धमेन्द्र के फिल्म अभिनेत्रियों को दिया गया।

वर्ष 1966 में प्रदर्शित फिल्म फूल और पत्थर की सफलता के बाद सही मायनों में बतौर अभिनेता धर्मेन्द्र अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। फिल्म में धमेन्द्र ने एक ऐसे मवाली गुंडे का अभिनय किया जो समाज की परवाह किये बिना अभिनेत्री मीना कुमारी से प्यार करने लगता है। दिलचस्प बात है आज के दौर के नायक अपने शरीर शैष्टव को दिखाने के लिये बेवजह कमीजउतार देते है पर इस फिल्म के जरिये धर्मेन्द्र ऐसे पहले नायक हुये जिन्होंने इस परंपरा की नीवं रखी। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के कारण वह फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार के लिये नामांकित भी किये गए।

धर्मेन्द्र को प्रारंभिक सफलता दिलाने में निर्माता-निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों का अहम योगदान रहा है। इनमें अनुपमा, मंझली दीदी और सत्यकाम जैसी फिल्में शामिल है। फूल और पत्थर की सफलता के बाद धर्मेन्द्र की छवि ..ही मैन ..के रूप में बन गयी। इस फिल्म के बाद निर्माता निर्देशकों ने अधिकतर फिल्मों मे धर्मेन्द्र की हैमैन वाली छवि को भुनाया।

70 के दशक में हुये एक सर्वेक्षण के दौरान धर्मेन्द्र को विश्व के हैंडसम व्यक्तिव में शामिल किया गया। धर्मेन्द्र के प्रभावी व्यक्तिव के कायल अभिनय सम्राट दिलीप कुमार भी हैं। दिलीप कुमार ने धर्मेन्द्र की बड़ाई करते हुये कहा था जब कभी मैं खुदा के दर पर जाउंगा मै बस यही कहूंगा मुझे आपसे केवल एक शिकायत है ..आपने मुझे धर्मेन्द्र जैसा हैंडसम व्यक्ति क्यों नही बनाया।

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धर्मेन्द्र को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 1997 में फिल्मफेयर का लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया तो उनकी आंखों में आंसू आ गये और उन्होंने कहा,मैने अपने करियर में सैकड़ो हिट फिल्में दी है लेकिन मुझे काफी अवार्ड के लायक नही समझा गया आखिरकार मुझे अब अवार्ड दिया जा रहा है मैं खुश हूं।

अपने पुत्र सन्नी दवोल को को लांच करने के लिए धर्मेन्द्र ने 1983 में बेताब बनाया जबकि वर्ष 1995 में दूसरे पुत्र बॉबी देओल को लांच करने के लिये वर्ष 1995 में बरसात का निर्माण किया। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद धर्मेन्द्र ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 2004 में राजस्थान के बीकानेर से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लडक़र लोकसभा के सदस्य बने।

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धर्मेन्द्र ने अपने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 250 फिल्मों में अभिनय कर चुके है लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें उनके कद के बराबर वह सम्मान नही मिला जिसके वह हकदार है लेकिन अमेरीका की प्रसिद्ध मैगेजीन टाइम पत्रिका ने विश्व के दस सुंदर व्यक्तियों में प्रथम उनके चित्र को मुखपृष्ठ में प्रकाशित कर और राजस्थान में उनके प्रशंसको द्वारा उनके वजन से दुगना खून देकर ब्लड बैंक की स्थापना करना महत्वपूर्ण उपलब्धी है। धर्मेंन्द्र इन दिनों फिल्म यमला पगला दीवाना फिर से में काम कर रहे हैं।

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