पुण्यतिथि विशेष: शंकर और जयकिशन के बीच भी हुई थी अनबन

Samachar Jagat | Wednesday, 12 Sep 2018 08:58:22 AM
Jai kishan death anniversary special

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मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत में सर्वाधिक कामयाब संगीतकार जोड़ी शंकर -जयकिशन ने अपने सुरों के जादू से श्रोताओं को कई दर्शकों तक मंत्रमुग्ध किया और उनकी जोड़ी एक मिसाल के रूप में ली जाती थी लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब दोनो के बीच अनबन हो गई थी। शंकर और जयकिशन ने एक दूसरे से वादा किया था कि वह कभी किसी को नहीं बताएंगे कि धुन किसने बनाई है लेकिन एक बार जयकिशन इस वादे को भूल गए और मशहूर सिने पत्रिका फिल्मफेयर के लेख में बता दिया कि फिल्म संगम के गीत 'ये मेरा प्रेम पत्र पढकर कि तुम नाराज न होना' की धुन उन्होंने बनाई थी।

इस बात से शंकर काफी नाराज भी हुये। बाद में पाश्र्वगायक मोहम्मद रफी के प्रयास से शंकर और जयकिशन के बीच हुए मतभेद को कुछ हद तक कम किया जा सका। शंकर सिंह रघुवंशी का जन्म 15 अक्तूबर 1922 को पंजाब में हुआ था। बचपन के दिनों से ही शंकर संगीतकार बनना चाहते थे और उनकी रूचि तबला बजाने में थी।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बाबा नासिर खानसाहब से ली थी। इसके साथ ही उन्होंने हुस्न लाल भगत राम से भी संगीत की शिक्षा ली थी। अपने शुरूआती दौर मे शंकर ने सत्यनारायण और हेमावती द्धारा संचालित एक थियेटर ग्रुप में काम किया।

इसके साथ ही वह पृथ्वी थिएटर के सदस्य भी बन गए जहां वह तबला बजाने का काम किया करते थे। इसके साथ ही पृथ्वी थियेटर के नाटकों मे वह छोटे मोटे रोल भी किया करते थे। जयकिशन का पूरा नाम जयकिशन दयाभाई पांचाल था। उनका जन्म चार नवम्बर 1929 को गुजरात के वंसाडा में हुआ था। जयकिशन हारमोनियम बजाने में निपुण थे और उन्होंने वाडीलालजी, प्रेम शंकर नायक और विनायक तांबे से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी हलांकि वह अभिनेता बनना चाहते थे। अभिनेता बनने का सपना लिए जयकिशन ने मुंबई का रूख किया जहां वह एक फैक्ट्री में टाइमकीपर 'समयपाल' की नौकरी करने लगे।

उसी दौरान उनकी मुलाकात शंकर से हुई। शंकर की सिफारिश पर जयकिशन को पृथ्वी थिएटर में हारमोनियम बजाने के लिए नियुक्त कर लिया गया। वर्ष 1948 में राजकपूर की पहली फिल्म आग में शंकर-जयकिशन ने संगीतकार राम गांगुली के सहायक के तौर पर काम किया। बाद में राजकपूर और राम गांगुली के बीच किसी बात को लेकर मतभेद हो गया। उन दिनों राजकपूर अपनी नई फिल्म बरसात की तैयारी कर रहे थे। राजकपूर ने शंकर जयकिशन को मिलने का न्योता भेजा। राज कपूर शंकर जयकिशन के संगीत बनाने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने शंकर जयकिशन से अपनी फिल्म बरसात में संगीत देने की पेशकश की।

फिल्म बरसात मे शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने जिया बेकरार है और बरसात में हमसे मिले तुम सजन जैसे सुपरहिट संगीत दिया। फिल्म बरसात की कामयाबी के बाद शंकर जयकिशन बतौर संगीतकार अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गए । इसे महज एक संयोग ही कहा जाएगा कि फिल्म बरसात से ही गीतकार शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी ने भी अपने सिने कैरियर की शुरूआत की थी। फिल्म बरसात की कामयाबी के बाद राजकपूर हसरत जयपुरी और शंकर जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मो मे एक साथ काम किया।

शंकर जयकिशन की जोड़ी गीतकार हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र के साथ काफी पसंद की गयी। शंकर-जयकिशन सर्वाधिक नौ बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। शंकर की जोड़ी जयकिशन के साथ वर्ष 1971 तक कायम रही। 12 सितंबर 1971 को जयकिशन इस दुनिया को अलविदा कह गए। अपने मधुर संगीत से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले संगीतकार शंकर भी 26 अप्रैल 1987 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।- एजेंसी

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