BIRTHDAY SPECIAL: एस. मोहिन्दर ने ठुकरा दिया था मधुबाला का विवाह प्रस्ताव, जानें क्या थी वजह

Samachar Jagat | Saturday, 08 Sep 2018 01:40:01 PM
S Mohinder birthday special

मुंबई। बीते जमाने के मशहूर संगीतकार एस.मोहिन्दर को एक बार बेपनाह हुस्न की मल्लिका मधुबाला से शादी का प्रस्ताव मिला था जिन्हें उन्हें ठुकरा दिया था। एस. मोहिन्दर मूल नाम मोहिन्दर सिंह सरना का जन्म अविभाजित पंजाब में मोंटगोमरी जिले के सिलनवाला गांव में 08 सितम्बर 1925 को एक सिक्ख परिवार में हुआ। मोहिन्दर के पिता सुजान सिंह बख्शी पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे। उनके पिता बांसुरी बहुत अच्छी बजाते थे जिसे वह बेहद प्यार से सुना करते थे। बचपन के दिनों से ही मोहिन्दर का रूझान संगीत की ओर हो गया था। वर्ष 1935 में मोहिन्दर ने गायक संत सुजान सिंह से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी शुरू की।

बाद में उन्होंने संगीतज्ञ भाई समुंद सिह से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। मोहिन्दर ने महान शास्त्रीय गायक बड़े गुलाम अली खां और लक्ष्मण दास से भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ग्रहण की थी। मोहिन्दर के पिता का लगतार तबादला हुआ करता था जिसके कारण उनकी पढ़ाई काफी प्रभवित हुआ करती थी। चालीस के दशक के प्रारंभ में उनका दाखिला अमृतसर जिले के कैरों गांव में खालसा हाई स्कूल में करा दिया गया। वर्ष 1947 में देश का विभाजन होने पर उनका परिवार तो भारत में पूर्वी पंजाब चला गया लेकिन संगीत के प्रति रूझान के कारण मोहिन्दर बनारस आ गए जहां उन्होंने दो साल तक शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली।

शुरूआती दौर में मोहिन्दर पाश्र्वगायक बनना चाहते थे। कुछ वर्ष तक वह लाहौर रेडियो स्टेशन से भी गायक के तौर पर काम किया इसी दौरान उनकी मुलाकात सुरैया से हुई जिन्होंने उन्हें मुंबई आने का न्यौता दिया। मुंबई आने पर मोहिन्दर की मुलाकात जानेमाने संगीतकार खेमचंद्र प्रकाश से हुई। खेमचंद्र प्रकाश की सिफारिश की वजह से मोहिन्दर को वर्ष 1948 में प्रदर्शित फिल्म सेहरा में बतौर संगीतकार काम करने का अवसर मिल गया। इस फिल्म से हालांकि उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिली। वर्ष 1950 में प्रदर्शित फिल्म नीली से बतौर संगीतकार मोहिन्दर कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे।

इस फिल्म में देवानंद और सुरैया ने मुख्य भूमिकायें निभाई थी। इस फिल्म के लिए मोहिन्दर ने सात हजार रूपए लिए थे। फिल्म नीली की सफलता के बाद मोहिन्दर को बड़े बैनर की फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए। इनमें पापी और शीरी फरहाद प्रमुख है। पापी में राजकपूर ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बेहतरीन संगीत के बावजूद फिल्म पापी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गई। शीरी फरहाद हालांकि टिकट खिड़की पर सफल रही। फिल्म शीरी फरहाद में मोहिन्दर के संगीत बनाने के अंदाज से मधुबाला बेहद प्रभावित हुई। शीरीं फरहाद फिल्म में उनके संगीतबद्ध गीत काफी लोकप्रिय हुए थे।

लता मंगेशकर की आवाज में रचा बसा यह गीत गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दोबारा, हाफिज खुदा तुम्हारा की तासीर आज भी बरकरार है। कहा जाता है कि मधुबाला ने मोहिन्दर के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था लेकिन मोहिन्दर शादीशुदा थे इसलिए उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कहा जाता है कि मधुबाला ने उनकी पत्नी के गुजारे और उनके बच्चों की पढाई-लिखाई के लिए हर महीने आर्थिक सहायता के रूप में भारी-भरकम रकम देने की पेशकश भी की थी। मोहिन्दर ने हिन्दी फिल्मों के अलावा कुछ पंजाबी फिल्मों और अलबमों के लिए भी संगीत दिया है।

मोहिन्दर की पंजाबी फिल्मो में दाज, नानक नाम जहाज, दुखभंजन तेरा नाम, चंबे दी कली, मन जीते जग जीत, पापी तारे अनेक औरमौला जट्ट प्रमुख है। फिल्म नानक नाम जहाज के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। मोहिन्दर ने नब्बे के दशक में कुछ प्राइवेट अलबमों के लिए भी संगीत दिया जिनमें कुछ भक्ति संगीत और कुछ पंजाबी लोकसंगीत पर आधारित थे। अमेरिका में भी उन्होंने भक्ति गीत और रोमांटिक गीतों के कुछ अलबम निकाले। मोहिन्दर गायक-गायिकाओं में मोहम्मद रफी, तलत महमूद तथा आशा भोंसले के बडे प्रशंसक थे। मोहिन्दर ने तलत महमूद की सरहना करते हुए कई बार कहा है कि मो.रफी की शैली को कई गायकों ने अपनाने की कोशिश की है लेकिन तलत महमूद की नकल करने की कोशिश कोई नहीं कर सकता है।- एजेंसी



 

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