बजट 2016 में तम्बाकू पर टैक्स-वृद्धि: क्या यह पर्याप्त है?

Samachar Jagat | Tuesday, 29 Nov 2016 03:33:55 PM
बजट 2016 में तम्बाकू पर टैक्स-वृद्धि: क्या यह पर्याप्त है?

चाहे अनचाहे, हर किसी को बजट का इन्तजार रहता है. बजट आता है और चला जाता है, अधूरे सपनों को फिर एक बार सब्जबाग दिखा या धराशायी कर. इसी तरह जनस्वास्थ्य कार्यकर्ता, विशेषकर जो कि तम्बाकू नियंत्रण में काम कर रहें उनके लिए भी बजट में तम्बाकू पर टैक्स (कर) की घटत-बढ़त अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है. आइये जाने ऐसा क्यूँ है और इस बार के बजट ने किस तरह से प्रभावित किया है- एक तम्बाकू नियंत्रण कार्यकर्ता के साथ आमजन को.

सन् 2003 में हुए एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते (फ्रेमवर्क कन्वेंशन फॉर टोबेको कण्ट्रोल- ऍफ़.सी.टी.सी.) के अंतर्गत अनुच्छेद छ: में तम्बाकू की दर और टैक्स की महती भूमिका (तम्बाकू पर प्रभावी टैक्स बढोतरी इसके उपभोग को घटाती है) को स्वीकारते हुए सदस्य-राष्ट्रों को इसकी मांग घटाने हेतु सुझाव दिए गये हैं- विशेषकर युवाओं में.

तम्बाकू और स्वास्थ्यकर्ता.....

सन् 2014 में संपन्न इनकी छठी संगोष्ठी (कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज- सी.ओ.पी.) में सदस्य-राष्ट्र पहली बार इस पर सहमत हुए कि “एक अच्छी तम्बाकू टैक्स नीति” हेतु क्या अच्छा है और क्या नहीं. पहला निष्कर्ष था क्योंकि तम्बाकू पदार्थों पर मात्र थोडा-सा टैक्स हर वर्ष बढाना पर्याप्त नहीं है, इस वृद्धि को नियमितता से मूल्य सूचकांक और मुद्रास्फीति से भी जोड़ा जाना चाहिए अन्यथा अपेक्षित लाभ गरीबों और युवाओं तक नहीं पहुँच पायेगा.

दूसरा निष्कर्ष था टैक्स में वृद्धि, बिना किसी जटिलता के, उत्पाद- व बिक्री- करों के मिश्रित स्वरुप को बढ़ा कर की जाये नाकि अन्य करों के द्वारा जैसे कि इनकम टैक्स, लाइसेंस शुल्क, वैट अथवा जी.एस.टी. द्वारा. तीसरा निष्कर्ष था कि यह विशिष्ट टैक्स वृद्धि सभी तम्बाकू पदार्थों पर समान रूप से की जाये ताकि तम्बाकू उपभोगी सस्ते तम्बाकू पदार्थों या एक विशिष्ट तम्बाकू पदार्थ के सस्ते प्रकार से अपने शौक, आदत या व्यसन पूरा ना कर पायें, उदाहरणार्थ महंगी सिगरेट के बजाये सस्ती छोटी बिना फ़िल्टर की सिगरेट या बीडी पीना अथवा पाउच में बिकने वाली चबाने वाली तम्बाकू का उपभोग.

अब यदि भारतवर्ष और राजस्थान में तम्बाकू पर टैक्स वृद्धि का कुछ पिछले वर्षों के आंकड़ों का मूल्यांकन करें तो यह स्पष्ट दिखाई देगा कि अब तक के सरकारी कदम अपर्याप्त हैं और उपरोक्त वर्णित छठी सी.ओ.पी. के निष्कर्षों के सर्वथा विपरीत. याने सरकारों ने, वर्ष 2016 के बजट में 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि सहित, मूलतः विशिष्ट सिगरेटों पर ही करी है. बीडी को हर बार या तो अछूता छोड़ा गया है अथवा इसकी टैक्स दरों को दिखावे-मात्र के लिए अप्रभावी रूप से बढाया गया है. चबाने वाली तम्बाकू पर कर वृद्धि का प्रभाव ना के बराबर ही रहा है जब तक यह सस्ते पाउचों के रूप में बिकती रहेगी.

इसी वर्ष फरवरी माह में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी एक रिपोर्ट “भारत में तम्बाकू टैक्स: एक अनुभवात्मक आकलन” इन निष्कर्षों को समर्थित कर यह बतलाती है कि: (1) अब तब की गयी टैक्स-वृद्धियाँ (2006 से 2013 तक) अपर्याप्त हैं; और, (2) वास्तव में तम्बाकू पदार्थ की कीमतें खाद्य पदार्थों की तुलना में घटी हैं. इस रिपोर्ट ने अनुशंसा करी कि सभी तम्बाकू पदार्थों पर प्रभावी टैक्स वृद्धि हो और तम्बाकू टैक्स-प्रणाली को विस्तारित कर इसके अनियंत्रित उत्पाद-तंत्र को भी इसमें सम्मिलित कर बीडी उध्योग को दी जाने वाली राहत (सब्सिडी) को समाप्त करे.

तम्बाकू और होंठ-मुंह-गले के कैंसर

राजस्थान में तम्बाकू टैक्स में वृद्धि का दौर सन् 2010-11 से प्रारंभ हुआ. अगले दो वर्षों में हुई बढोतरी से इसे भारत में तम्बाकू पर सर्वाधिक कर (65%) लगाने वाले प्रदेश के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति भी मिली. परन्तु क्या इससे प्रदेश में तम्बाकू उपभोग कम हुआ? हालाँकि इसे निश्चित रूप से तो अगले वर्ष प्राप्त होने वाले भारत के लिए किये गए ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वे (गेट्स) के दूसरे चक्र द्वारा ही जाना सकेगा किन्तु निश्चित रूप से पिछले वर्ष की सरकारी अनुशंसा कि तम्बाकू पदार्थों पर लगने वाला 65% टैक्स घटा कर 45% कर दिया जाये, एक प्रभावी तम्बाकू नियंत्रण के मापदंडों पर एक प्रतिगामी (रेग्रेस्सिव) कदम ही माना जा रहा है.

अतः बीडी सहित सभी तम्बाकू पदार्थों पर समान रूप से टैक्स वृद्धि, कम से कम वर्तमान स्तर से दूगुना कर सदैव के लिए मूल्य-सूचकांक और मुद्रास्फीति दर से जोड़ दिया जाना चाहिए. तब ही हो सकेगी अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय अनुशंसाओं की पालना, और गरीबों व युवाओं का तम्बाकू की महामारी से बचाव. अन्यथा मात्र तम्बाकू उध्योग और उसे हितधारक ही लाभान्वित होते रहेंगे.

लेखन-

डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान कैंसर फाउंडेशन और वैश्विक परामर्शदाता, गैर-संक्रामक रोग नियंत्रण (कैंसर और तम्बाकू).  

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