जीवनशैली में सुधार और लक्षणों की पहचान कर काबू किया जा सकता है पित्ताशय का कैंसर

Samachar Jagat | Monday, 12 Mar 2018 10:01:59 AM
By improving lifestyle and recognizing symptoms, gallbladder cancer can be overcome

लखनऊ। उत्तर भारत में तेजी से फैल रहे पित्ताशय के कैंसर को संतुलित जीवनशैली और शुरूआती लक्षणों की पहचान से काबू किया जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार दुनिया के किसी भी देश की अपेक्षा उत्तर भारत में इस रोग से ग्रसित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। पित्त की थैली का कैंसर साइलेंट किलर की तरह लोगों की जिदगी में दाखिल हो रहा है। पीड़ित इस बीमारी से अन्त समय तक अनजान रहता है। उसको अन्तिम चरण मे इस बीमारी का पता चलता है। इसका सबसे बड़ा कारण इस बीमारी में किसी प्रकार के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसी के चलते सही समय पर जांच नहीं हो पाती है और यह बीमारी विकराल रूप ले लेती है।

जानेमाने गैस्ट्रो सर्जन डा के बी जैन ने बताया कि अधिकतर मरीजों में इस बीमारी का पता तब चलता है, जब वह पित्त की थैली के साथ अन्य अंगों को भी प्रभावित कर देते है। जिसके बाद मर्ज लाइलाज हो जाता है। बहुत सारे ऐसे कैंसर जो पित्त की थैली में होने वाली पथरी होने के दौरान पाए जाते हैं । समय पर पहचान नहीं हो सकने की दशा में यह रोग जानलेवा साबित हो सकता है। डा. जैन ने बताया कि पित्ताशय में पथरी देश में एक आम बीमारी बन चुकी है हालांकि इसका समय से उपचार नही कराया जाए तो यह लिवर को प्रभावित कर सकती है।

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पित्ताशय पेट के दाहिने हिस्से में एक छोटा, नाशपाती के आकार का अंग होता है, जो लिवर के ठीक नीचे स्थित होता है। पित्ताशय में एक पाचक द्रव होता है, जिसे बाइल (पित्त) कहते हैं जो छोटी आंत में उत्सर्जित होता है। पित्ताशय की पथरी इसी द्रव के इकठ्ठा होने से बना सख्त हिस्सा है जो पित्ताशय में उत्पन्न होता है। पित्ताशय की पथरी का आकार रेत के कण से लेकर गोल्फ की गेंद तक का हो सकता है। पित्ताशय एक बड़े आकार की पथरी, छोटी-छोटी सैकड़ों पथरी, या छोटी और बड़ी दोनों प्रकार की पथरी उत्पन्न कर सकता है।

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पित्ताशय की पथरी आमतौर पर दो प्रकार की होती हैं। पित्ताशय में पाए जाने वाली पथरी का 80 प्रतिशत कोलेस्ट्रॉल की पथरी का होता है, जो कि आमतौर पर पीले-हरे रंग की होती है। इसके अलावा रंगद्रव्य (पिगमेंट) की पथरी छोटी और गहरे रंग की होती है और बिलीरुबिन से निर्मित होती हैं। उन्होने बताया कि पित्ताशय की पथरी से पीड़ित कई लोगों में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं होते।

आमतौर पर लक्षणों की शुरुआत तब होती है जब एक या अधिक पथरी पित्ताशय से निकलकर पित्त नलिका में आ जाती है, जहाँ यह अटक या फंस जाती है। इसके कारण एकाएक तीव्र दर्द होता है, जिसे पित्ताशय का दर्द (बिलियरी कालिक) कहते हैं, और इसके कारण होने वाली सूजन को पित्ताशय की सूजन (कोलीसिस्टाइटिस) कहा जाता है। चिकित्सक ने बताया कि फास्टफूड के अलावा वसा एवं मसालेदार भोजन का अत्यधिक सेवन और अनियमित दिनचर्या इस बीमारी के तेजी से पनपने की मुख्य वजहों में शामिल है।

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तेल के अधिक इस्तेमाल कोलस्ट्राल का स्तर बढाने का कारक साबित होता है जिससे मोटापा बढने और बदहजमी होती है। अगर समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह समस्या पित्त की थैली को प्रभावित करती है। इसके अलावा पित्त की थैली में पथरी के कारण वजन मे तेजी से कमी आ सकती है। मधुमेह, गर्भावस्था,व्रत और हार्मोन के असंतुलन भी बीमारी के पनपने की मुख्य वजह है। डॉ. सिह ने बताया कि किसी विकसित देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या न के बराबर होने से इस पर कोई देश शोध भी नहीं करता है।

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इसलिए यह रोग और पांव पसारता जा रहा है। हालात यह है कि प्रदेश की पूरी आबादी में से तीन प्रतिशत लोग इस बीमारी से ग्रसित है। इन तीन फीसदी लोगों में से आधे प्रतिशत लोग ही चिकित्सकों के पास समय रहते इलाज के लिए पहुंच पाते है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी तथा उदासीनता ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। 2010 में पहली बार प्रदेश में इस बीमारी पर शोध की शुरूआत हुई। लेकिन कब और कैसे इसकी जांच करानी चाहिए इसके लिए अभी तक कोई गाइड लाइन नहीं बनाई गई।

चिकित्सक ने बताया कि पेट के दाहिनी तरफ लगातार दर्द होना अथवा पेट में गैस बदहजमी के साथ भारीपन होना और दवा लेने के बाद भी सही न होना जैसे लक्षणों के नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर ऐसा हो तो तत्काल विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। डा. सिंह ने बताया कि 90 प्रतिशत मरीजों को बीमारी का पता चौथी स्टेज पर चलता है तब तक गॉल ब्लाडर के साथ शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित हो चुके होते हैं। इसके बाद यह लाइलाज हो जाता है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में गॉल ब्लाडर कैंसर ज्यादा पाया जा रहा है। कैंसर के आने वाले कुल मामलों में 20 प्रतिशत मामले गॉल ब्लाडर कैंसर के होते हैं।

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चिकित्सक ने बताया कि गॉल ब्लाडर में पथरी होने के बाद डॉक्टर्स सर्जरी की सलाह देते हैं। इस दौरान यह ध्यान रखना चाहिए की सर्जरी से पहले कैंसर की जांच अवश्य करा लें। अगर कैंसर हुआ तो सर्जरी के दौरान और फैल सकता है। इसके बाद मरीज की आयु सिर्फ छह महीने रह जाती है। क्योंकि गॉल ब्लाडर कैंसर के 60 से 70 प्रतिशत मामलों में मरीज के गॉल ब्लाडर में पथरी पाई गई। मरीज के लक्षणों पर ध्यान दें तो इस प्रकार के कैंसर का पता सर्जरी के पहले चल सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है। एजेंसी



 

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