राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत एनिमिया की गति को तीन गुना कम करने का लक्ष्य : मोदी

Samachar Jagat | Tuesday, 11 Sep 2018 01:39:46 PM
Target to reduce the speed of anemia under National Nutrition Campaign: Modi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को बताया कि एनीमिया या खून की कमी का स्तर हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है और सरकार ने तय किया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन गुना किया जाए। आशा कर्मियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ नरेन्द्र मोदी एप और वीडियो लिंक के माध्यम से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, '' एनीमिया मुक्त भारत के इस संकल्प को आप सभी पूरी ताकत से पूरा करेंगे। एनीमिया से मुक्ति का मतलब लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जीवन दान है।’’ उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर एनीमिया एक बहुत बड़ी समस्या है। देश में काफी संख्या में लोग एनीमिया के शिकार हैं।

ये बीमारी आयोडीन और आयरन जैसे तत्वों की कमी से होती है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आयोडीन युक्त नमक का उपयोग बढ़ा है। मोदी ने कहा कि अब आप सभी कार्यकर्ताओं को आयोडीन और आयरन युक्त डबल फोर्टिफाइड नमक के इस्तेमाल के लिए लोगों को और जागरूक करना पड़ेगा ताकि एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि एनीमिया या खून की कमी हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है और सरकार ने तय किया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन प्रतिशत किया जाए। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तरप्रदेश की महिलाओं को इस बात की जानकारी है कि किस तरह इंसेफ़ेलाइटिस की बीमारी का प्रभाव रहा।

सरकार ने इससे निपटने के लिए कई मिशन शुरू किया है। जापानी इंसेफ़ेलाइटिस समेत पांच नए टीके जोड़े गए हैं। मोदी ने बताया कि दो साल पहले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत 1.5 करोड़ महिलाओं की जांच की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व बंदन योजना के तहत 5000 रूपए की सहायता दी जा रही है। आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, '' स्वस्थ और सक्षम भारत के निर्माण में आप सभी की शक्ति पर मुझे, पूरे देश को पूरा भरोसा है। हमें मिलकर कुपोषण के खिलाफ, गंदगी के खिलाफ, मातृत्व की समस्याओं के खिलाफ सफलता हासिल करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि देश की हर मां पर बच्चों को मजबूत करने का जिम्मा है।

पोषण यानी खानपान, टीकाकरण, स्वच्छता के बारे में ऐसा नहीं है कि पहले लोग इस बारे में जानते नहीं थे या पहले इसकी कोई योजना नहीं थी । उन्होंने कहा कि इन तमाम बातों में पहले बहुत अधिक सफलता नहीं मिली। बहुत कम संसाधनों वाले देश भी इस मामले में हम से आगे निकल गए हैं । मोदी ने साथ ही कहा, '' मैं देश के उन हजारों-लाखों डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जो बिना कोई फीस लिए, गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहे हैं।’’ मोदी ने कहा कि यदि देश का नागरिक सही से रुप से पोषित और विकसित होगा तो देश के विकास को कोई नहीं रोक सकता है। लिहाज़ा शुरुआती हज़ार दिनों में देश के भविष्य की सुरक्षा का एक मज़बूत तंत्र विकसित करने का प्रयास हो रहा है।

किसी भी शिशु के लिए जीवन के पहले एक हज़ार दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान मिला पौष्टिक आहार, खान-पान की आदतें उसका शरीर, पढना-लिखना और मानसिक स्तर तय करती हैं। उन्होंने कहा कि कमज़ोर नींव पर मज़बूत इमारत का निर्माण नहीं हो सकता। इसी प्रकार यदि देश का बचपन कमज़ोर रहेगा तो उसके विकास की गति धीमी हो जाएगी। उन्होंने कहा, रक्षाबंध के रक्षा सूत्र से आप बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने के काम से जनता को जोड़ रहे हैं। आपके इस प्रयास को मैं नमन करता हूं। लगभग 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की योजना आयुष्मान भारत का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा में एक नवजात इसका पहला लाभार्थी रहा है।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सुपोषण स्वास्थ्य मेले का आयोजन होता है। मेले के दौरान कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण, ग्राम स्तर पर सामुदायिक बैठकों का आयोजन और कुपोषित बच्चों के परिजनों को खान पान की सलाह दी जाती है। बच्चे की ही नहीं बल्कि प्रसूता माता के स्वास्थ्य की भी सभी चिता कर रहे हैं। सरकार के सुरक्षित मातृत्व अभियान की अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंचानी है। मोदी ने कार्य प्रणाली बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जन्म के 42 दिन तक आशा कार्यकताã को छह बार बच्चे के घर जाना होता था। अब 15 महीने तक 11 बार बच्चे का हालचाल जानना ज़रूरी है। इस स्नेह और अपनेपन से एक से एक बेहतरीन नागरिक देश को मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'होम बेस्ड न्यूबोर्न केयर’ के माध्यम से हर वर्ष देश के लगभग सवा करोड़ बच्चों की देखभाल की जा रही है।

कार्यकर्ताओं की मेहनत से ये कार्यक्रम सफल हो रहा है तथा इसको और विस्तार दिया गया है। अब इसको 'होम बेस्ड चाइल्ड केयर’ का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि एनीमिया हर वर्ष सिर्फ एक प्रतिशत की दर से घट रही है। सरकार ने राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत इस गति को तीन गुना करने का फैसला किया है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, एनीमिया मुक्त भारत के इस संकल्प को आप सभी पूरी ताकत से पूरा करने वाले हैं। एनीमिया से मुक्ति का मतलब लाखों गर्भवती महिलाओं और बच्चों को जीवन दान। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को आयोडीन और आयरन युक्त डबल फोर्टिफाइड नमक के इस्तेमाल के लिए लोगों को और जागरूक करना पड़ेगा ताकि एनीमिया जैसी बीमारियों को दूर किया जा सके। मोदी ने देश के हजारों-लाखों डॉक्टरों का भी आभार व्यक्त किया जो बिना कोई फीस लिए, गर्भवती महिलाओं की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में काम रही आंगनवाडी, आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से सीधी बात की और उनके कामकाज के बारे में पूछा।- एजेंसी

 

 



 

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