तम्बाकू का नशा, छोड़ें, छुडायें....

Samachar Jagat | Saturday, 26 Nov 2016 01:31:21 PM
तम्बाकू का नशा, छोड़ें, छुडायें....

आवश्यक है उपचार व्यवस्था की सर्वत्र उपलब्धता..!! क्योंकि सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश में ~60% से 70% तम्बाकू उपभोगी इसे अगले साल तक छोड़ना नहीं चाहते हैं, अतः यह आवश्यक है कि उन्हें व उनके मित्रों-परिवारों को इसे छोड़ने के लाभों की जानकारी लगातार मिलती रहे ताकि ना केवल उनका इस हेतु रुझान और विश्वास बढ़े, एक सामाजिक धारणा भी स्थापित हो सके कि तम्बाकू खाना-पीना एक रोग हैं और हर तम्बाकू उपभोगी एक रोगी है. फिर सर्वत्र तम्बाकू-उपचार व्यवस्था  की मांग भी उठेगी और तम्बाकू उपभोगीयों को भी उनके परिवारजन, मित्र, इत्यादि, अपने बदले दृष्टिकोण से सहानुभूति और सतर्कता से उन्हें समय से उपचार हेतु प्रेरित कर अस्पताल भी ले भी आयेंगे.

तम्बाकू उपभोगियों के लिए सुनिश्चित किये गए दिन-दिनांक पर दृढ़ता इसे छोड़ पाना सफलता का पहला और निर्णायक कदम होता है. तम्बाकू-मुक्त जीवन हेतु यह निर्णय भी आवश्यक होता है कि “ना खरीदेंगे, ना किसी से खरीद्वायेंगे और किसी अन्य से मांगेंगे भी नहीं”. इसे याद दिलाने वाले स्टीकर-पोस्टर घर, ऑफिस और कार, इत्यादि में लगाना उपयोगी होता है. बिना तम्बाकू के रह पाने के उपायों-विकल्पों को लागू कर पाना जब वे पहले उन परिस्थितियों में इसे खाते-पीते थे तम्बाकू उपचार की कुंजी है. परिवार-मित्रों का सकारात्मक और उत्साहवर्धक सहयोग सफलता बढ़ाता है. तम्बाकू उपभोगी इसे पुनः ना खाने-पीने लगें, इस हेतु अत्यधिक प्रसन्नता वाली या दुखदायी परिस्थितियों में सदैव अतिरिक्त सावधानी रखना और किसी भी अन्य दीर्घावधी के रोग के समान नियमित चिकित्सकीय परामर्श लेते रहना अत्यधिक लाभकारी होता है.

स्वास्थ्य के लिए बड़ा फायेदमंद है करीपत्ता

तम्बाकू-उपचार में दवाओं की भूमिका तम्बाकू में उपस्थित व्यसनी पदार्थ “निकोटिन” की कमी से तत्काल में हो रहे शारीरिक परिवर्तन (प्रतिकार लक्षणों) से निपटने हेतु किया जाता है. किन्तु, परामर्श ही प्रभावी उपचार प्रक्रिया का मूल आधार है क्योंकि तब ही एक तम्बाकू उपभोगी अपना व्यवहार परिवर्तन कर इसके मानसिक और सामाजिक कारकों से मुक्ति पा सकता है. अतः परामर्श और दवाओं के मिलेजुले तरीके से किया गया उपचार अधिक सफलता देता है.

स्वास्थ्यतंत्र में तम्बाकू उपचार व्यवस्था की अनुपलब्धता और स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा इसे संतोषजनक और गुणवतापूर्ण तरीके से दे पाने की क्षमता, रूचि और निष्ठा की कमी दूसरी चुनौती है. वर्तमान में मात्र एक-तिहाई तम्बाकू उपभोगीयों में से ~30% से 40% को ही इसे छोड़ने की चिकित्सकीय राय मिलती है. प्रदेश में पिछले छः माहों में इस चुनौती का समाधान अब कुछ सीमा तक होता दीख रहा है. प्रादेशिक तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा भारत सरकार के राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत और पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन, नई देहली के माध्यम से अब प्रदेश के आधे जिलों में जिला-, ब्लाक- और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों- स्तर पर प्रशिक्षित चिकित्सक उपलब्ध हैं जो कि संतोषजनक कुशलता से तम्बाकू उपभोगियों को इस व्यसन से मुक्ति दिला सकते हैं. अतः कोई भी तम्बाकू उपभोगी जब किसी अन्य रोग के उपचार हेतु किसी भी चिकित्सक जाएँ तो वे स्वयं या उनके परिवारजन उनके चिकित्सक से तम्बाकू-उपचार विशिष्टता से मांगें और इसे पूर्णता व संतोषजनक तरीके से प्राप्त भी करें.

यदि उन्हें वह व्यवस्था वहाँ नहीं मिले तो इस हेतु प्रादेशिक मेडिकल हेल्पलाइन (नि:शुल्क टेलीफोन सेवा न. 104) पर कॉल कर सकते हैं. यह परामर्श सेवा प्रात: 7 बजे से रात्री 9 बजे तक हर दिन उपलब्ध है. यह सेवा प्रदेशवासियों हेतु सन् 2013 से ही उपलब्ध है, विशेषकर उनके लिए जो तम्बाकू उपभोगी किसी स्वास्थ्य सेवा हेतु न जा पायें या न जाना चाहें. इस गुणवता-भरी सबूत-आधारित सेवा का लाभ, पूर्ण गोपनीयता से, वे घर बैठे उठा सकते हैं. अतः महिलाओं हेतु इसकी अत्यधिक उपयोगिता है. दिसम्बर 2015 तक ~4,000 तम्बाकू उपभोगी इसका लाभ उठा चुके हैं. वर्ष 2013 और 2014 में इसकी सफलता 18% रही जो कि वर्तमान प्रादेशिक तम्बाकू छोड़ने की दर से नौ गुना अधिक है. प्रादेशिक तम्बाकू-नियंत्रण प्रकोष्ठ आई.ई.सी. में बढोतरी कर जनमानस को इसका लाभ व्यापकता से दिला सकता है.  

प्रेगनेंसी के समय कुपोषण के गंभीर प्रभाव

अस्पतालों में तम्बाकू उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु लेखक द्वारा जयपुर के एस. के. सोनी अस्पताल (अब सोनी मणिपाल अस्पताल) में सन् 2013 में इस हेतु एक विशिष्ट जांच- उपचार- फॉलो-अप मॉडल - तंबाकू उपचार प्रोटोकोल”, लागू किया गया था. इसमें हर पंजीकृत तम्बाकू-उपभोगी रोगी को उसके मूल रोग के उपचार के अतिरिक्त उसकी अनुमति के पश्चात् तम्बाकू उपभोग हेतु उपचारित कर ~26% सफलता प्राप्त की गयी.

इनमें से जिनसे साल भर तक टेलीफोन द्वारा फॉलो-अप किया जा सका उनमें यह सफलता 54% से 84% तक प्राप्त हो सकी. प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के- और अन्य बड़े प्राइवेट- अस्पतालों में इस मॉडल को स्थापित कर जनमानस को एक प्रभावी लाभ दिया जा सकता है. अंततः तम्बाकू नियंत्रण की सफलता में तम्बाकू-उपचार का शीघ्रातिशीघ्र जुड़ाव ही प्रदेश को तम्बाकू के बोझ से हो रही हानियों और मृत्युओं में प्रभावी कमी दिला सकता है.   
 

लेखन-

डॉ. राकेश गुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान कैंसर फाउंडेशन और वैश्विक परामर्शदाता, गैर-संक्रामक रोग नियंत्रण (कैंसर और तम्बाकू).              

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