कार्डिनल ने माना: पादरियों के बाल यौन उत्पीड़न अपराधों की फाइलें नष्ट की गई

Samachar Jagat | Sunday, 24 Feb 2019 10:21:50 AM
Cardinal admits: files of child sexual harassment crimes of the clergy were destroyed

वैटिकन सिटी। एक शीर्ष कैथोलिक अधिकारी ने शनिवार को कहा कि बच्चों का यौन शोषण करने वाले पादरियों से संबंधित गिरजाघर की फाइलें नष्ट कर दी गई या फिर उन्हें कभी तैयार ही नहीं किया गया, ऐसे में गुनहगारों को दूसरों को अपना शिकार बनाने का मौका मिला।

जर्मन कार्डिनल रीनहार्ड मार्क्स ने पादरियों के हाथों बच्चों के यौन शोषण की समस्या के समाधान पर एक ऐतिहासिक वैटिकन सम्मेलन में कहा कि जिन फाइलों से (बाल यौन शोषण के) भयावह कृत्यों की पूरी कहानी सामने आती और गुनहगारों का खुलासा होता, उन्हें नष्ट कर दिया या उन्हें तैयार ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि गुनहगारों के बजाय, पीडितों को ही बेजा नियमों से बांध दिया गया और उन्हें चुप करा दिया गया।

उन्होंने कहा कि अपराधों पर अभियोजन के लिए निर्धारित प्रक्रिया जानबूझ कर तैयार नहीं की गई, उल्टे उसे रद्द कर दिया गया। मार्क्स दुनिया भर के शीर्ष पादरियों की एक अप्रत्याशित सभा के तीसरे दिन अपनी बात रख रहे थे जिसे पोप फ्रांसिस ने उस संकट से निपटने के प्रयास के तौर पर बुलाया है। इस संकट ने दशकों से रोमन कैथोलिक चर्च को घेर रखा है।

वर्तमान स्कैंडल दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुका है और हाल ही में चिली, जर्मनी एवं अमेरिका से मामले सामने आए।
कार्डिनल ने जर्मन चर्च में पादरियों के यौन हमलों के शिकार हजारों लोगों से सितंबर में व्यक्तिगत रूप से माफी थी और कहा था कि अपराधियों को इंसाफ के कठघरे में खड़ा किया जाएगा। इससे पहले जर्मन बिशप कांफ्रेंस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 1946-2014 के दौरान जर्मनी में 3700 नाबालिगों को शिकार बनाया गया। उनमें ज्यादातर लड़के थे।

रिपोर्ट के लेखकों के मुताबिक यह आंकड़ा पूरे मामले में बस एक छोटा अंश है। जांचों से रहस्योद्घाटन हुआ है कि कई मामलों में नाबालिगों पर यौन हमला करने के आरोपी पादरियों को स्थानांतरित कर दिया गया है और बिशप गिरजाघर की प्रतिष्ठा को बचाने के नाम पर इस सब पर अपनी आंखें बंद कर ली गई। मार्क्स ने कहा कि पीडितों के अधिकारों को रौंद डाला गया और उन्हें कुछ व्यक्तियों की मनमर्जी पर छोड़ दिया गया।

ये सभी ऐसी घटनाएं हैं जो गिरजाघर के मूल्यों के विपरीत जाती हैं। कार्डिनल ने कहा कि जरूरी है कि पीडिèत महसूस करे कि वे व्यवस्था पर भरोसा कर सकते हैं। फ्रांसिस ने अपने बिशपों से कहा है कि वह बाल यौन उत्पीड़न के खिलाफ ठोस कदम चाहते हैं लेकिन रोम में पीड़ितों के समूह ने वैटिकन पर बस अच्छी बातें करने और कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। वेटिकन पहले बाल उत्पीड़न की जांच कर रहे नागरिक प्रशासन को आंतरिक दस्तावेज सौंपने से इंकार कर चुका है। 



 

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