गुटेरेस बोले, तेजी से हो रहा है जलवायु परिवर्तन

Samachar Jagat | Tuesday, 09 Oct 2018 12:05:30 PM
Guteres says, climate change is happening fast

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र(संरा) प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि विश्व में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है और यह हमारे अनुमानों से भी कहीं अधिक है। उन्होंने सोमवार को संरा वैज्ञानिक पैनल द्बारा ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने पर एक विशेष रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि इस बहुप्रतीक्षित निष्कर्ष में बताया गया है कि जलवायु में परिवर्तन काफी तेजी से हो रहा है और हमारे पास इसमें सुधार करने के लिए समय भी नहीं बचा है।

अंतरराष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) ने दक्षिण कोरिया के इंचीओन से यह रिपोर्ट जारी की है। पैनल के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए मानव व्यवहार में'दूरगामी और अभूतपूर्व परिवर्तन की आवश्यकता है। आईपीसीसी कार्यकारी समूहों के सह अध्यक्ष पनमाओ झाई ने कहा कि हम लोग पहले ही ग्लोबल वार्मिंग के एक डिग्री सेल्सियस के दुष्परिणामों जैसे प्रतिकूल मौसम, समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी और आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री बर्फ के पिघलने और अन्य परिवर्तनों को देख चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि 2015 में 21 वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में 195 देशों ने महत्वपूर्ण पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति वैश्विक स्तर पर लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करना था। गुटेरेस ने रिपोर्ट जारी होने के तुरंत बाद ट्वीट कर कहा रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर रोकना कोई असंभव काम नहीं है लेकिन हम लोगों को सभी क्षेत्रों में सामूहिक तौर पर कदम उठाने होंगे और इस काम में कतई भी देरी नहीं की जानी चाहिए। 

गुटेरस ने बाद में जारी बयान में कहा कि जलवायु परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए सभी को कदम उठाने होंगे और इसके तहत 2030 तक उत्सर्जन का स्तर घटाकर आधा करना होगा और 2050 तक उत्सर्जन के स्तर को शून्य करने का लक्ष्य हासिल करना होगा।

उन्होंने कहा इसके लिए हम लोगों को समाज में सभी ­ष्टिकोणों से अभूतपूर्व परिवर्तन करना होगा, विशेषकर भूमि, ऊर्जा, उद्योग, भवन, परिवहन और शहरों में परिवर्तन की आवश्यकता है। वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी होगी और अरबों पौधे लगाने होंगे, खनिज तेल के ईंधन के रूप में इस्तेमाल में तेजी से कमी करनी होगी और 2050 तक कोयले के इस्तेमाल को बंद करना होगा।

सौर ऊर्जा और पवन चक्की जैसे ऊर्जा के स्रोतों को बढ़ावा देना होगा। जलवायु के अनुकुल दीर्घकालिक खेती पर निवेश और नई तकनीक 'कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज’ पर विचार करना होगा। 



 

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