अच्छे मानव का आभूषण है दान : मुनिश्री

Samachar Jagat | Thursday, 11 Oct 2018 02:54:29 PM
Good man's jewelery is charity: Munici

आवां। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जिसके हृदय में दया नहीं वह दानी कभी नहीं हो सकता। दान ऐसा हो जिसमें बदले में उपकार पाने की कोई भावना न हो। दाधीचि का दान, कर्ण का दान और राजा हरिश्चंद्र के दान ऐसे ही दान की श्रेणी में आते हैं। 

मुनिश्री ने उक्त विचार बुधवार को सुदर्शनोदय तीर्थ आवां में धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैन ग्रंथों में पात्र, सम और अन्वय के भेद से दान के चार प्रकार बताए गए हैं। पात्रों को दिया हुआ दान पात्र, दीन-दुखियों को दिया हुआ दान करुणा, सहधार्मिकों को कराया हुआ प्रीतिभोज आदि सम तथा अपनी धन संपत्ति को किसी उत्तराधिकारी को सौंप देने को अन्वय दान कहा है। दोनों में आहार दान, औषध दान, मुनियों को धार्मिक उपकरणों का दान व उनके ठहरने के लिए वसति दान को मुख्य बताया गया है। ज्ञान दान और अभय दान को भी श्रेष्ठ दानों में गिना गया है। 

मुनिश्री ने कहा कि दानशील मनुष्य वहीं होता है जो करुणावान हो, त्यागी हो और सत्कर्मी हो। एक अच्छे मानव में ही दानशीलता का गुण होता है। अथर्ववेद के एक श्लोक में लिखा है कि सैकड़ों हाथों से कमाना चाहिए और हजार हाथों वाला होकर समदृष्टि से दान देना चाहिए, किए हुए कर्म का और आगे किए जाने वाले कर्म का विस्तार इसी संसार में और इसी जन्म में करना चाहिए। हमें इसी संसार में और इसी जन्म में जितना संभव हो सके, दान करना चाहिए। यदि हम ईश्वर की अनुभूति के अभिलाषी हैं तो हमें उसकी संतान की सहायता हरसंभव करनी चाहिए।

आत्मविश्वास से शक्ति का संचार होता

मुनिश्री ने कहा कि सकारात्मक सोच सही मायने में एक अच्छा और कुशल जीवन जीने की कला है। सकारात्मक द्रष्टिकोण आनंद की अनुभूति देता है। कभी-कभी जीवन में हर तरफ से दुखों और तकलीफों से घिरने के बाद भी सकारात्मक भाव रखते हुए यह विश्वास बनाए रखना कि सब ठीक हो जाएगा, हमें कठिनाइयों से लडऩे की शक्ति प्रदान करता है। नकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति थोड़े से दु:ख और कठिनाई अनुभव करते ही खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। सकारात्मक सोच रखने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और आत्मविश्वास से शक्ति का संचार होता है। सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति मुश्किल से मुश्किल परिस्तिथियों में भी अपना आपा नहीं खोते व शांत रहकर समस्या का हल निकाल लेते हैं।

नकारात्मक भाव से आपसी रिश्तों में दरार

मुनिश्री ने कहा कि आज के समय में दाम्पत्य जीवन और परिवार बिखरने का सबसे बड़ा कारण ही मन में नकारात्मक भाव का आना है। अपने जीवन साथी और माता-पिता भाई के प्रति नकारात्मक नजरियां आपसी रिश्तों में तनाव बढ़ाने के साथ-साथ हमेशा के लिए दूरियां बना देता है। जीवन में एक कामयाब इंसान बनने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सकारात्मक सोच का ही होता है। नकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति तो विरासत में मिली धन-सम्पति और मान-सम्मान भी खो देते है।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.