मनुष्य को चाहिए कि आत्मा का हित करें : मुनिश्री

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Mar 2018 10:45:42 AM
Human beings should love the soul: Munishri

मदनगंज-किशनगढ़। मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि यह संसार भ्रम जाल है जिसमें हम फंसे हैं। इस भ्रम जाल को मोह कहते हैं, मोह के कारण प्राणी अपनी आत्मा से अपरिचित ही रहता है। वह संसार के पदार्थों को जानकर भी स्वयं को भूला हुआ है। मोह के कारण मानव को बाह्य पदार्थों, धन सम्पति, घर परिवार ही अपने लगते हैं। इस शरीर को सजाने से आत्मा संतुष्ट नहीं होती। मुनिश्री ने उक्त विचार मंगलवार को महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में धर्मसभा में व्यक्त किए। 

उन्होंने कहा कि चर्मचक्षुओं से आत्मा का वैभव दिखाई नहीं देता। उसे देखने के लिए तो श्रद्धा रूपी तीसरी आंंख चाहिए। आपको दूसरे व्यक्ति का तो परिचय उन्हें अच्छे से जानते हो लेकिन आज तक अपनी आत्मा को नहीं जान पाया। ऐसा व्यक्ति परमात्मा की भी जान पाएगा। मैं तो शुद्ध आत्मा हंू लेकिन इस तन रूपी मिट्टी के पुतले में मोहवश पड़ा हुआ है।

जैसे नाव और नाविक अलग-अलग है, उसी प्रकार यह शरीर अलग है और आत्मा अलग है। जो शरीर के हित में लगा है वह आत्मा का हित नहीं कर सकता जो स्वयं का आत्महित नहीं कर सकता वह दूसरे का आत्म हित कैसे कर सकता है। सम्पत्ति को जोडऩे में नहीं बल्कि सम्पत्ति को छोडऩे में आत्महित है। आत्मा को शांति मिलती है, बाह्य पदार्थों को छोडऩे से, कषायों को छोडऩे में है। आत्मशांति का मार्ग आत्मसाधकों के पास प्राप्त होता है। संतों के पास बैठने से शांति का अनुभव होता है।

 जब संतों के पास बैठने से तुम्हें शांति मिलती है और यदि संतत्व तुम्हारे अन्दर बैठक जाएगा तो तुम्हे सच्चे सुख-शांति की प्राप्ति हो जाएगी। प्रचार-प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया बुधवार प्रात: 8:15 बजे मुनि सुव्रतनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। इसके बाद 9:30 बजे मुनिश्री के प्रवचन, 10:30 बजे मुनिश्री की आहारचर्या, 12 बजे सामायिक व सांय 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।



 

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