जिन दर्शन शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

Samachar Jagat | Tuesday, 25 Sep 2018 06:57:48 PM
Jinn Darshan Festival

देवली। मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज, मुनि महा सागर जी, मुनि निष्कंप सागर जी, क्षुल्लक धैर्य सागर व क्षुल्लक गंभीर सागर के सानिध्य में सुदर्शनोदय तीर्थ आंवा में सोमवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़़ा। श्रावक संस्कार शिविर के समापन पर अतिशय तीर्थ से विशाल जिन दर्शन शोभायात्रा निकाली गई। जिससे आवां नगरी धर्ममय हो गई। दो किमी तक श्रावकों की हजारों सफेद ध्वज पताकाएं आकाश में लहरा रही थी तो हाथी और घोड़ों के साथ बेण्ड-बाजे यात्रा में चार-चांद लगा रहे थे।

यात्रा के स्वागत में ग्रामीणों ने पलक पावड़े बिछा दिए। पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी ने भी अपने निवास पर शिविरार्थियों सहित लगभग पांच हजार धर्मावलम्बियों को माला और श्रीफल भेंट कर पेयजल पिलाया। सैनी ने सपरिवार मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ससंघ का पाद-प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। सैनी ने गुरु की चरण वन्दना कर आरती भी उतारी। तीर्थ क्षेत्र पर साधकों ने दशलक्षण पर्व के शिविर में प्राप्त किए ज्ञान की परीक्षा के परिणाम के आधार पर अच्छे अंक लाने वाले श्रावकों को समापन समारोह में स्मृति चिह्न एवं प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

श्रावकों ने पढ़ा धर्म और चरित्र का पाठ
मुनिश्री ससंघ के मंगल चातुर्मास एवं दशलक्षण शिविर में दिए जा रहे प्रशिक्षण से जिज्ञासुओं के ज्ञान चक्षु जागृत हो साधु तत्व की अनुभूति हुई है। साधना कार्यक्रमों में श्रावकों ने धर्म और चरित्र का पाठ पढ़ा। साधना के विभिन्न सौंपानों से गुजर रहे इन तीन हजार से अधिक शिविरार्थियों को गुरु के सामिप्य का लाभ मिला है। समापन के दौरान साधकों में गुरु को नमन कर आशीष लेने की होड़ सी लगी रही।

शिविर्थियों को किया सम्मानित
समिति के संयोजक संजय छाबड़ा ने बताया कि आचार्य शिरोमणि विद्या सागर जी महाराज के साथ तीर्थ पर मौजूद मुनि ससंघ के नाम से शिविरार्थियों को 6 समूहों में विभाजित कर परीक्षा ली गई थी। प्रत्येक समूह में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले को समिति की ओर से सम्मानित किया गया।

धर्म को धारण करें : मुनिश्री
मुनिश्री ने शिविर समापन के दौरान साधकों को पे्ररित किया कि मन्दिर में जाने के बाद घर लौटने के नहीं सिद्धालय में जाने के भाव आने चाहिए। धर्म से सोना और मिट्टी के प्रति सम भाव पैदा हो जाता है। धर्म ही मानव को मोक्ष का मार्ग दिखाता है।श्रावकों को धर्म को धारण करने का पाठ पढ़ाते हुए मुनिश्री ने कहा कि दशलक्षण पर्व में दिए गए प्रशिक्षण के सार को अपनी दिनचर्या में उतारें। इस अवसर पर मुनिश्री ने दान, तप और त्याग का महत्व समझाकर स्वर्ग का रास्ता भी दिखाया। मानव को धन दौलत, पद, प्रभाव और अन्न का सदुपयोग करने के उपदेश देते हुए मुनिश्री ने धर्म में दान करने की महत्वता समझाई। मुनिश्री ने शास्त्रों के अनुसार पात्र को ही दान देने की सीख दी। मुनिश्री ने जिन्दगी के हर पल को मूल्यवान बताते हुए 24 घंटे की दैननन्दिनी बनाने की अनिवार्यता समझाई। उन्होंने कहा कि दिन का कार्य रात में और रात्रि का काम दिन में मत करो। कभी इस प्रकार का गलत कार्य मत करो कि हवालात में जाना पड़ जाए।

गुरु की महिमा अपार : सैनी
शिविर समापन  के अवसर पर अपने निवास पर आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री डॉ. प्रभु लाल सैनी ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए चरण वन्दना का महत्व समझाया। सैनी ने गुरु को जीवन का पथ प्रदर्शक बताकर गुरु भक्ति की राह भी दिखाई। दशलक्षण पर्व के शिविर को ऐतिहासिक बताते हुए संयम, तप, साधना और चरित्र निर्माण पर प्रकाश डाला।
 



 

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