जीवन है चलने का नाम : मुनिश्री

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Feb 2018 09:39:46 AM
Life is the name of walking: Munishri
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अजमेर। मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन एक प्रवाह है जहांं पर चलना ही चलना होता है जब तक लक्ष्य नहीं मिल जाता तब तक चलते रहना चाहिए, ठहरने पर आपका जीवन गंदा हो जाएगा। पानी जब जब ठहर जाता है तो या तो सूख जाता है या सड़ जाता है लेकिन जब वह बहता है निर्मल स्वच्छ हो जाता है। 

मुनिश्री ने उक्त विचार महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में मंगलवार को धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि दया, करुणा का नाम धर्म है। अदया, अकरुणा का नाम अधर्म है। धर्म वहीं है जो दु:ख से हटाकर सुख की ओर ले जाता है। धर्म की अनेकों परिभाषाएं हैं, पर सभी का मुख्य क्षय मानवीय गुणों का विकास है। वह धर्म, धर्म नहीं जिसमें हिंसा होती है, जो हिंसा करने की बात कहता है। सभी धर्मों में एक ही बात कही है कि किसी को नहीं सताना, अहिंसा परमो धर्म है, जियो और जिने दो, ऐसे सिद्धांतों को जीवन में अपनाने वाले ही धार्मिक कहलाते हैं। क्षमा आत्मा का गुण है, ये ऐसी दिव्य शक्ति है जिसके द्वारा मानव अपने दोषों से मुक्त हो सकता है, ज्यों-ज्यों दोष हमारे उपर हावी होते जाते है, त्यों-त्यों हम भयभीत व दु:खी होते जाते हैं। क्षमाशील के निर्भीकता होती है वह वीर कहलाता है। क्योंकि क्षमा करने वाला सबसे बड़ा होता है। 

जिस प्रकार तराजू का वही पलड़ा झुकता है जो भारी हो, वृक्ष वही झुकता है जो फलों से लदा हुआ हो उसी प्रकार वो ही महापुरुष झुक सकता है जो गुणों में भारी हो। जो प्रभु परमात्मा के सामने झुकता है वह सबको अच्छा लगता है लेकिन जो सबके सामने झुकता है वह प्रभु परमात्मा को अच्छा लगता है। जो ज्ञानी है क्षमावान है वह प्रतिशोध नहीं लेता बल्कि अपने आत्मिक गुणों की शोध करता है और वह दूसरों से बदला नहीं, स्वयं को बदलने का प्रयास करता है।

महापुरुष पत्थरों की चोट खाकर भी पत्थर मारने वाले को क्षमा किया करते हैं। क्रोध अग्नि है जो आत्मा को जलाता लेकिन क्षमा आत्मा के गुणों कें वृद्घि करने वाली है। क्षमा का प्रारंभ बड़ों से होता है। यदि घर के बुजुर्ग परिवार के सदस्यों से सुबह शाम क्षमा याचना व क्षमा प्रदान करते रहे तो सच मानिए वह घर स्वर्ग बन जाए, उनसे छोटे स्वयं आकर बड़ों के चरणों में झुक जाएंगे। 

जीवन में निभने और निभाने की कला जिसके पास है वह कभी भी असफलताओं को अपना मेहमान नहीं बनाता अर्थात् वह उन्नतशील ही कहलाता है। जिसके पास जो होता है वह उसी को देता है, हम किसी को मारकर शत्रुता को नहीं मार सकते, यदि हम शत्रुता को मार दे तो शत्रु स्वत: ही नष्ट हो जाएगा। प्रचार-प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया बुधवार प्रात: 8:15 बजे से विघ्नहर श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। इसके बाद मुनिश्री के प्रवचन प्रात: 9:30 बजे ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली स्थित प्रवचन पण्डाल में होगें। 10:30 बजे मुनिश्री की आहारचर्या, 12 बजे सामायिक व सांय 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।

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