संत पुरुष आपदाओं को झेलकर भी दूसरों का भला ही करते हैं: मुनिश्री

Samachar Jagat | Tuesday, 13 Feb 2018 11:20:17 AM
Saint men do good to others by facing disasters: Munici

अजमेर। महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में त्रिदिवसीय मोक्ष कल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को प्रात: 7:00 बजे 1008 कलशों से अभिषेक पूजन एवं शांतिधारा, प्रात: 8:30 बजे निर्वाण लाडू कार्यक्रम दीपावली महोत्सव के रुप में सम्पन्न हुआ। इसी क्रम में प्रात: 10:30 बजे विश्व शांति महायज्ञ एवं पूजन किया गया, सांय 6:00 बजे जिज्ञासा समाधान व सांय 7:00 बजे विघ्नहर मुनिसुव्रतनाथ भक्तामर रिद्वि मंत्रों के द्वारा प्रज्जवलित महाआरती का आयोजन किया गया जिसमें परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज का संसघ सानिध्य प्राप्त हुआ। 

उक्त कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों व बच्चों ने भाग लिया। इसी क्रम में 8:30 बजे मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन पाण्डाल में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कुमुदनी के पत्ते पर जल कब तक ठहरता है कुछ कह नहीं सकते, चिकने घड़े पर जलबिंदु कितनी देर तक ठहरे कहा नहीं जा सकता। मौत और वैराग्य का भी कोई भरोसा नहीं कि कब जा जाए। इतने से जीवन में व्यक्ति जड़, जोरू, जमीन के पीछे कषाय करता है, झांसे करता है। जब तक शरीर जर्जर नहीं हुआ तब तक निर्जरा की तैयारी कर लेनी चाहिये। जरा (बुढ़ापा) आने पर निर्जरा नहीं हो पाती अर्थात् धर्म ध्यान नहीं हो पाता है। धर्म स्वभाव से होता है।

 धर्म दबाव से प्राप्त नहीं होता। बिना निर्जरा के मुक्ति नहीं। मुक्ति के लिए भक्ति की युक्ति हो और आत्मा की शक्ति हो। जिस प्रकार पारा ठहरता नहीं फिर भी यदि उसे आधार मिल जाए तो वह ठहर सकता है। दूसरी चीज है ‘‘आयु। आयु अर्थात् उम्र को भी रोका नहीं जा सकता है। यह आयु की वायु कब उड़ जाए कह नहीं सकते। अनहोनी घटना भी घट सकती है चाहें कितनी भी प्रकार से अपनी कुण्डली दिखा लो। आयु का भरोसा मत करना, आयु का उपयोग करना। यौवन का भरोसा नहीं करना उसका सदुपयोग करना।

 इसी प्रकार लक्ष्मी का भरोसा मत करना उसका सदुपयोग करना। सज्जन पुरुष ही इस प्रकार की प्रक्रिया कर सकता है। जिस प्रकार फलदार वृक्ष को पत्थर मारने पर भी वह मिठा फल देता है, उसी प्रकार संत पुरुष अनेकों आपदाओं को झेलकर भी दूसरों का भला ही करते है जिस प्रकार गाय खल को खाकर भी उसे दूध रूप परिवर्तित कर देती है । संतों के वचन सुनकर व्यक्ति पाप से बच जाता है। यह जानकारी देते हुए प्रचार प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया मंगलवार को प्रात: 8:15 बजे से विघ्नहर श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा तत्पश्चात् परम पूज्य पुगंव सुधा सागर जी महाराज के प्रवचन प्रात: 9:30 बजे ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली स्थित प्रवचन पण्डाल में होंगें, इसके पश्चात् 10:30 बजे मुनि श्री की आहारचर्या, 12:00 बजे सामायिक व सांय 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।



 

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