शास्त्र की मर्यादा में रहो : मुनिश्री

Samachar Jagat | Saturday, 13 Oct 2018 04:42:08 PM
Stay in the bounds of scripture: Munici

आवां। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि सज्जन व्यक्ति मन, वचन और कर्म से एक ही विचार से कार्य के प्रति सजग रहते हैं। सच्चरित्रता के लिए निवृयसनता अत्यंत आवश्यक है।

 जो व्यक्ति शास्त्र की मर्यादा का उल्लंघन करता है और मनमानी करता है, वह न तो सफलता प्राप्त कर सकता है और न शांति और न ही मोक्ष को प्राप्त होता है। ऐसे लोग प्रत्येक परिस्थिति में धीरज रखने वाले, क्षमाशील, मन से पवित्र, क्रोध न करने वाले, अपनी इंद्रियों को नियंत्रण में रखने वाले, योगाभ्यासी और सत्पुरुषों का संग करने वाले होते हैं।

 मुनिश्री ने उक्त विचार शुक्रवार को सुदर्शनोदय तीर्थ आवां में धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सच्चरित्रता और सदाचारिता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सदाचारिता का अर्थ है सत्पुरुषों का आचरण। 

मुनिश्री ने कहा कि मनु महाराज ने सदाचार के चार लक्षण बताए हैं-वेद और वेदानुकूल शास्त्रों के अनुसार आचरण, सत्पुरुषों के समान व्यवहार और इनका सबसे बड़ा धन यह भावना होती है कि हम अपने लिए जो हितकारी समझते हैं, वही दूसरों के लिए भी हितकारी समझें। ऐसे लोग जहां भी हों, उस स्थान को सुखमय बना देते हैं, यही सज्जनता की सुगंध है। सच तो यह है कि सज्जनता पर ही दुनिया कायम है। जिस मानव धर्म की बात की जाती है, उसकी नींव सज्जनता पर ही टिकी होती है।

समिति के ओमप्रकाश जैन, धर्मचंद जैन ने बताया कि प्रतिदिन प्रात: 7:30 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा, 9:00 बजे मुनिश्री के प्रवचन, 10:30 बजे आहारचर्या, 12 सामायिक व सांय 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम हो रहे हैं।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2018 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.