सबसे बड़ा और पहला सुख निरोगी काया है: मुनिश्री

Samachar Jagat | Monday, 12 Feb 2018 11:51:35 AM
The biggest and the first happiness is the healthy work: Munishri

अजमेर। महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में त्रिदिवसयी मोक्ष कल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को प्रात: 7:00 बजे 1008 कलशों से अभिषेक पूजन एवं शांतिधारा का आयेाजन किया गया तत्पश्चात् प्रात: 8:30 बजे मंगल प्रवचन हुए व दोपहर 1:00 बजे विघ्नहर मुनिसुव्रतनाथ भक्तामर विधान तथा सांय 6:00 बजे जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी क्रम में सांय 7:00 बजे विघ्नहर मुनिसुव्रतनाथ भक्तामर रिद्धि मंत्रों के द्वारा प्रज्जवलित महाआरती की गई जिसमें परम पूज्य मुनि पंूगव सुधा सागर जी महाराज का संसघ सानिध्य प्राप्त हुआ।

इसी क्रम में रविवार को 8:30 बजे मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन पाण्डाल में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमें प्रकृति ने हर प्रकार की वस्तु दी है, उसका सदुपयोग करो तो वह वस्तु तुम्हारा जीवन भर साथ देगी। यदि बुद्घि मिली है तो उसका प्रयोग करो। कम्प्यूटर, कैलकुलेटर आदि का ज्यादा सहारा ना लो। शरीर से अपना और दूसरों का कार्य करो जिससे शरीर में कोई रोग ना लगे। सबसे बड़ा और पहला सुख निरोगी काया है। निरोगी व्यक्ति ही जाग्रत हो सकता है अन्यथा वह सोया हुआ है। यह जीवन धन और यौवन से कुमुदनी के पत्ते पर पड़ी जल की बंूद के समान क्षणभंगुर है इसके रहते इसका सदुपयोग कर के आत्म कल्याण में सहयोगी बना लो अन्यथा ये तीनों तुम्हारे लिए दुर्गति का कारण बन जाएगा। व्यक्ति को जब यौव चढ़े तब यौवन के तले मोक्ष मार्ग पर अपने भले के लिए कदम बढ़ा लेना चाहिए।

 बालक के लिए होना चाहिए कि वह सच्चा हो, अच्छा हो, दिल का कच्चा हो, तो उसे सभी स्नेह वात्सल्य देंगें। रात भर जागकर चिल्लाना, ना तो खुद सोना और ना ही दूसरों को सोने देना, यह जागरण नहीं। विवेकता युक्त जीवन होने वाले व्यक्ति का जीवन ही जागरण है। आंख का खुली रहना जाग्रत अवस्था नहीं। जो व्यक्ति आंख बंद किये है, बाहर से सोया हुआ है उसे तो जगाया जा सकता है लेकिन जो आंख खोलकर अन्दर से सोया हुआ है उसे कोई भी नहीं जगा सकता । जो बाहर की धार्मिक क्रिया नहीं कर रहा तो उसे क्रिया के लिए प्रेरित किया जा सकता है लेकिन जो धर्म की क्रिया करते हुए भी अन्दर से सुस्त है उसे कोई नहीं समझा सकता है। 

घर के आंगन में खड़ा बूढा वृक्ष और द्वार पर बिछी खटिया पर पड़े बूढे बाप पर काटने, डांटने, छांटने और बांटने के लिए कुछ नहीं है। उस वृक्ष को आंगन में खड़े रहने दो यदि वह फल नहीं देगा तो फूल तो देगा ही और फूल भी नहीं तो छाया देगा, छाया में भी गर कमी आ गई है तो कम से कम ऑक्सीजन तो देगा जो प्राणवायु है।

यह जानकारी देते हुए प्रचार प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया कि त्रिदिवसीय मोक्ष कल्याणक महोत्सव में सोमवार को प्रात: 7:00 बजे 1008 कलशों से अभिषेक पूजन एवं शांतिधारा, प्रात: 8:30 बजे निर्वाण लाडू, दीपावली महोत्सव, मंगल प्रवचन, प्रात: 10:30 बजे विश्व शांति महायज्ञ एवं पूजन, सांय 6:00 बजे जिज्ञासा समाधान, सांय 7:00 बजे विघ्नहर मुनिसुव्रतनाथ भक्तामर रिद्वि मंत्रों के द्वारा प्रज्जवलित महाआरती का आयोजन किया जायेगा जिसमें परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज का संसघ सानिध्य प्राप्त होगा।



 

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