जब आवै संतोष धन, सब धन धुरि समान : मुनिश्री

Samachar Jagat | Thursday, 15 Feb 2018 09:39:28 AM
When satisfaction wealth is equal to all the money: Munici
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मदनगंज-किशनगढ़। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आप बीती कहानी सदैव याद करते हुए चलना चाहिए क्योंकि इससे व्यक्ति संयमित हो जाता है और बुराइयों को दोहराना छोड़ देता है। मुनिश्री ने उक्त विचार बुधवार को महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में धर्मसभा में व्यक्त किए।

मुनिश्री ने कहा कि जीवन दो प्रकार का होता है- एक जीवंत और दूसरा मुर्दा जीवन। जैसे डॉक्टर, वैद्य आदि आपकी नाड़ी फाडक़र बताता है कि आप रोगी है कि नहीं। इसी प्रकार संत पुरुष आपकी चेतना की नाड़ी पकडक़र बताते हैं कि आप जीवंत है कि मुर्दा। जिसका जीवन निर्दोष है जिसे आत्मा की प्रतीति है, जिसके पास दया करुणा, संयम, समीचीन श्रद्वा, ज्ञान चरित्र है उसका जीवन जीवंत कहा जाता है जिसके जीवन में कलंक लगा है वह जीवन जीवंत नहीं और यदि जिसने अपना जीवन धर्म के साथ जिया है वह मृत हो जाने पर भी जीवंत है, अमर है। भारतीय संस्कृति उसे जीवंत मानती है जिसके जीवन में शांति संतोष, पवित्रता और स्वभाविक आनन्द ये चार है। 

व्यक्ति यदि शांति को छोड़ कलह में जीता है तो वह मरने की सोचता है। जीवंत जीवन का सही आनन्द वहीं ले सकता है जिसके अन्दर शांति है। शांति दो प्रकार की है चेतना से निष्पन्न, पराधीन शांति। व्यक्ति अंहकार के साथ जीता है अकड़ता है लेकिन उसे ये नहीं पता कि अकडऩ मुर्दे की पहचान है। मुठ्ठी भर राख और चुल्लु भर पानी, इस जीवन की इतनी ही कहानी। जब तक मान रहता है तब तक व्यक्ति अच्छी बातों को मान नहीं पाता।

 तीसरी कषाय मायाचारी को करने वाले के चित में माया शूल की तरह चुभती रहती है। गुप्त पाप करने वाला जीवनभर रोता ही रहता है। गुप्त पाप करने वाला किसी से कुछ नहीं कह सकता, सह नहीं सकता, शांति से रह नहीं सकता। संतोषी व्यक्ति का जीवन जीवंत है। जिसने दूसरे की रोटी को छीनने का प्रयास किया है वह स्वयं की रोटी भी चैन से नहीं खा पाता। संतोष रूपी धन ही सच्चा धन है। इसके बिना दुख ही दुख है। जीवंत जीवन के लिए चित्त में पवित्रता होनी चाहिये जिसका हृदय पवित्र है उस हृदय पवित्र है उस हृदय में सुख शांति का निवास होता है। आनन्द का आषय अपनी आत्मा का स्वभाविक आनन्द होना, सही गलत की पहचान होना। ऐसे आनन्द की अनुभूति होना ही जीवंत जीवन कहलाता है भारतीय संस्कृति में।

प्रचार-प्रसार संयोजक विनीत कुमार जैन ने बताया कि गुरुवार को प्रात: 8:15 बजे से विघ्नहर श्री 1008 मुनि सुव्रतनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा होगी। इसके बाद मुनिश्री के प्रवचन प्रात: 9:30 बजे ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली स्थित प्रवचन पण्डाल में होंगे। 10:30 बजे मुनिश्री की आहारचर्या, 12 बजे सामायिक व सांय 5:30 बजे महाआरती एवं जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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