अक्षय तृतीया का व्रत और पूजा करने से होती है अक्षय फल की प्राप्ति

Samachar Jagat | Tuesday, 17 Apr 2018 04:13:41 PM
Akshay Tritiyas fasting and worship is achieved by achieving Akshaya fruits

धर्म डेस्क। वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है, इस दिन व्रत और पूजा पाठ करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के दिन व्रत और पूजा-पाठ क्यों किया जाता है। इसके बारे में पुराणों में एक कथा का वर्णन मिलता है, आइए आपको बताते हैं अक्षय तृतीया की कथा के बारे में...........

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पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। उसकी सदाचार, देव और ब्राह्मणों के प्रति काफी श्रद्धा थी। इस व्रत के महात्म्य को सुनने के पश्चात उसने इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की, व्रत के दिन स्वर्ण, वस्त्र तथा दिव्य वस्तुएं ब्राह्मणों को दान में दी।

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अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के बावजूद भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान व पूजन के कारण वह बहुत धनी प्रतापी बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेश धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे।

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Why is Akshaya Tritiya so important

अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ। माना जाता है कि यही राजा आगे चलकर राजा चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ।

(source-google)

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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