भगवान ने भी पृथ्वी पर जन्म लेकर सच्ची मित्रता की मिसाल की कायम

Samachar Jagat | Sunday, 05 Aug 2018 05:43:02 PM
God also sustains precedence of true friendship by taking birth on Earth

धर्म डेस्क। दोस्ती या मित्रता कोई एक शब्द नहीं है बल्कि ये वो रिश्ता है जो व्यक्ति खुद बनाता है। इसी कारण ये रिश्ता खून के रिश्तों से भी बढ़कर माना जाता है, जब कोई साथ नहीं देता है तब भी एक सच्चा मित्र अपनी मित्रता निभाता है। दोस्ती का रिश्ता अभी से शुरू नहीं हुआ है बल्कि ये तो तब से चला आ रहा है जब भगवान ने पृथ्वी पर मानव के रूप में जन्म लिया। उन्होंने भी पृथ्वी पर आकर सच्ची मित्रता की मिसाल कायम की । आइए जानते हैं इनके बारे में.......

राम-सुग्रीव की मित्रता :-

जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर राम अवतार लिया तब उन्हें वनवास जाना पड़ा, इसी समय उनकी पत्नी माता सीता का रावण ने हरण कर लिया और सीता को खोजते -खोजते उन्हें सुग्रीव जैसा सच्चा मित्र मिला। जिसने मन-वचन से राम का साथ दिया और माता सीता का पता लगाया।

कृष्ण - सुदामा मित्रता :-

सुदामा गरीब ब्राह्मण थे और भगवान श्री कृष्ण से उनकी मुलाकात गुरू संदीपन के आश्रम में हुई थी। दोनों से एक साथ आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और इसके बाद दोनों अलग हो गए। लेकिन जब सुदामा ने दिल से भगवान कृष्ण को याद किया तो भगवान कृष्ण ने अपनी मित्रता को सच्चे दिल से निभाया। 

दुर्योधन-कर्ण की मित्रता :-

आज भी लोग कहते हैं कि मित्र हों तो कर्ण और दुर्योधन के जैसे, कर्ण सूत पुत्र थे इसके बाद भी दुर्योधन ने कर्ण से मित्रता की। कर्ण ने भी अपने मित्र दुर्योधन का मरते दम तक साथ निभाया। 

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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