यहां जमीन में गढ़ा हुआ है परशुराम का फरसा, जो भी हाथ लगाता है हो जाती है उसकी मौत

Samachar Jagat | Monday, 06 May 2019 11:42:05 AM
Here Parasurama ax is worn in the ground Whoever hands it dies

धर्म डेस्क। परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हुआ था। परशुराम धर्नुविद्याके ज्ञाता थे और उन्हें अपना फरसा बहुत प्रिय था। माना जाता है कि आज भी परशुराम का फरसा पृथ्वी पर है और ये झारखंड में रांची से करीब 150 किमी की दूरी पर घने जंगलों में स्थित टांगीनाथ धाम में गड़ा हुआ है। नक्सल प्रभावित इस इलाके में अलग ही भाषा चलती है और यहां की स्थानीय भाषा में फरसा को टांगी कहा जाता है, इसलिए इस जगह का नाम टांगीनाथ धाम हो गया। खबरों के अनुसार इस जगह भगवान परशुराम का फरसा जमीन में गड़ा हुआ है और यहां पर परशुराम के चरण चिह्न भी मिले हैं। ये फरसा यहां कैसे आया इसके बारे में एक लोककथा प्रचलित है जो इस प्रकार है...

जिस घर में होता है ये छोटा सा पौधा उस घर से नकारात्मक शक्तियां रहती हैं दूर और कभी नहीं होती है धन की कमी

रामायण में जब सीता स्वयंवर में भगवान श्रीराम ने शिव का धनुष तोडा़ तब परशुराम को बहुत क्रोध आया और वे स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। उस दौरान लक्ष्मण से परशुराम का विवाद हुआ। बाद में जब उन्हें ये ज्ञात हुआ की श्रीराम परमपिता परमेश्वर हैं तो उन्हें अपनी इस गलती के लिए पछतावा हुआ और वे जंगलों में चले गए।

इन विशेष योगों के कारण इस बार की अक्षय तृतीया हो गई है बहुत खास, जानिए पूजा और सोना-चांदी क्रय का शुभ मु​हूर्त

दुखी होकर उन्होंने अपने फरसे को वहीं जंगल में जमीन में गाढ़ दिया और उस स्थान पर भगवान शिव की स्थापना की। उसी जगह पर आज टांगीनाथ धाम स्थित है और यहां के स्थानीय लोगों के अनुसार परशुरामजी का वही फरसा आज भी यहां गड़ा हुआ है, एक बार इस इलाके में लोहार आकर रहने लगे थे।

काम के दौरान उन्हें लोहे की जरूरत हुई तो उन्होंने परशुराम का यह फरसा काटने की कोशिश की। फरसा तो नहीं कटा बल्कि लोहार के परिवार वालों की मौत होने लगी और घबराकर उन्होंने ये स्थान छोड़ दिया। इसी कारण आज भी यहां कोई इस फरसे से हाथ नही लगाता है।

( इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है । )

सत्यवती ने इन तीन शर्तों को पूरा करने के बाद किया था ऋषि पाराशर के प्रेम को स्वीकार, जानिए क्या था इसका महाभारत से संबंध

नया व्यवसाय शुरू करने जा रहे हैं तो अपनी राशि के अनुसार इन अक्षरों से शुरू करें नाम, व्यापार में मिलेगी सफलता



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.