अगर भगवान शिव के क्रोध से बचना चाहते हैं तो शिवलिंग पर भूलकर भी ना चढ़ाएं ये फूल

Samachar Jagat | Monday, 06 Aug 2018 09:48:24 AM
If you want to avoid the anger of Lord Shiva, do not forget even these flowers by forgetting on Shivling

धर्म डेस्क। भगवान शिव की अगर सच्चे मन से पूजा-अर्चना की जाए तो वे बहुत ही आसानी से प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं लेकिन वहीं अगर कोई ऐसा काम कर दिया जाए जो भोलेनाथ को पसंद नहीं है तो वे क्रोधित भी जल्दी ही होते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं भोलेनाथ पर चढ़ाए जाने वाले फूलों की, जहां कुछ फूल भगवान शिव को बहुत प्रिय होते हैं और अगर उन्हें भगवान शिव को अर्पित किया जाए तो वे प्रसन्न होते हैं वही कुछ फूलों को शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित बताया गया है, एक फूल तो ऐसा है अगर उसे शिवलिंग पर चढ़ाया जाए तो इससे भगवान शिव रूष्ठ हो जाते हैं और उनके क्रोध को शांत करना असंभव हो जाता है। आइए आपको बताते हैं इस फूल के बारे में .............

ये फूल केतकी के फूल है, इस फूल से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जो इस प्रकार है, एक बार ब्रह्माजी व विष्णु जी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सहमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा। अतः दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग की छोर ढूढंने निकले। 

Why Lord Vishnu was robbed of deceit, Shiva's beloved place

छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए। ब्रह्मा जी भी सफल नहीं हुए परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुंच गए थे। उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी का एक सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा और न ही ब्रह्माजी की पूजा की जाएगी। इसी कारण ब्रह्माजी की पूजा नही की जाती है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)



 

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