कैसे होती है कुंभ की गणना, कितने सालों बाद पड़ता है महाकुंभ, जानिए कुंभ से जुड़ी इन खास बातों के बारे में...

Samachar Jagat | Wednesday, 09 Jan 2019 06:24:59 PM
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धर्म डेस्क। कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित होने जा रहा है, एक जगह पर बारह वर्ष बाद आयोजित होने वाले कुंभ का देशी और विदेशी मेहमानों को बेसब्री से इंतजार होता है। इस बार कुंभ स्नान 14 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है और इसका समापन 4 मार्च को होगा। कुंभ को लेकर बहुत सी ऐसी विशेष बातें हैं जिनके बारे में लोगों को जानकारी नहीं होती है आइए आपको बताते हैं इनके बारे में.............

शास्त्रों के अनुसार 12 कुंभ होते हैं जिनमें से चार कुंभ पृथ्वी पर मानवों के लिए होते हैं और आठ कुंभ का आयोजन देवलोक में किया जाता है। इसी कारण व्यक्ति इन आठ कुंभ के आयोजनों में हिस्सा नहीं ले सकता है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मृत्यु के पश्चात व्यक्ति को जन्म - मरण के बंधन से छुटकारा मिलता है और वह देवलोक को गमन करता है।  

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शास्त्रों के अनुसार, जब देव और दानवों में अमृत कलश के लिए युद्ध हुआ तो अमृत की पहली बूंद प्रयाग में गिरी, दूसरी बूंद हरिद्वार में गिरी, तीसरी बूंद उज्जैन में गिरी और चौथी अमृत की बूंद नासिक में जाकर गिरी। इसी कारण इन चार जगहों पर प्रत्येक 12 वर्ष बाद कुंभ का आयोजन किया जाता है।

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कुंभ की गणना एक विशेष विधि से होती है, आपको बता दें कि गुरू एक राशि में लगभग एक वर्ष तक रहता है और बारह राशियों में भ्रमण करने में उसे 12 वर्ष की अवधि लगती है। इसी कारण प्रत्येक बारह साल बाद एक स्थान पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।

कुंभ का पहला स्नान साधु संन्यासी करते है और इसे शाही स्नान कहा जाता है, इसके बाद ही कुंभ मेले में स्नान के लिए आम लोगों को अनुमति मिलती है। 

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हर 144 वर्ष बाद महाकुंभ का आयोजन होता है क्योंकि देवताओं का बारहवां वर्ष पृथ्वी लोक के 144 वर्ष के बाद आता है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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